नई दिल्ली। भारत ने डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था का दर्जा प्राप्त कर लिया है। वहीं, AI प्रदर्शन के मामले में भारत चौथे स्थान पर पहुंच गया है। यह जानकारी आईसीआरआईईआर (ICRIER) और प्रोसस सेंटर फॉर इंटरनेट एंड डिजिटल इकोनॉमी (IPCIDE) की ओर से जारी ‘स्टेट ऑफ इंडियाज़ डिजिटल इकोनॉमी (SIDE) 2026’ रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत ने डिजिटल विकास और AI अपनाने की रफ्तार में जर्मनी, फ्रांस, जापान, ब्रिटेन और कनाडा जैसे विकसित देशों को पीछे छोड़ दिया है। 71 देशों के आंकड़ों पर आधारित इस अध्ययन में भारत को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था रैंकिंग में पांचवां स्थान मिला है, जबकि वर्ष 2025 में देश आठवें स्थान पर था।
AI प्रदर्शन को मापने वाले CHIPS-AI इंडेक्स में भारत चौथे स्थान पर रहा। इस सूची में केवल अमेरिका, चीन और सिंगापुर भारत से आगे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा AI टैलेंट पूल बन चुका है और वैश्विक AI उपयोगकर्ताओं में उसकी हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में दुनिया के 72 प्रतिशत AI उपयोगकर्ता विकासशील देशों में हैं। भारत और चीन मिलकर वैश्विक AI अपनाने के लगभग दो-पांचवें हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह वैश्विक डिजिटल परिदृश्य में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
भारत ने डिजिटल व्यापार के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। देश का डिजिटल रूप से संचालित व्यापार 328 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज इंटरनेट विस्तार, फिनटेक सेवाओं और डिजिटल नवाचारों ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को AI निवेश, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत तकनीकी संसाधनों के क्षेत्र में अभी और मजबूती लाने की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जोखिम पूंजी, अनुसंधान और स्टार्टअप इकोसिस्टम को और बढ़ावा दिया जाए तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक AI शक्ति के रूप में और मजबूत होकर उभर सकता है।
रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारत अब केवल एक बड़ा डिजिटल बाजार नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक AI और डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्रों में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।




