नई दिल्ली। नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। सम्मेलन से महज 48 घंटे पहले तक बीजिंग की ओर से उनकी यात्रा को लेकर स्पष्ट आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी। हालांकि, बाद में चीनी विदेश मंत्रालय ने शी जिनपिंग के भारत आने की पुष्टि कर दी। यह करीब सात साल बाद उनकी भारत यात्रा होगी।
शी जिनपिंग की प्रस्तावित यात्रा को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच 2020 के गलवन संघर्ष के बाद रिश्तों में लंबे समय तक तनाव रहा। पिछले कुछ समय में सीमा पर तनाव कम करने और द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कुछ प्रगति हुई है। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की संभावित द्विपक्षीय बैठक पर विशेष नजर रहेगी।
व्यापार और सीमा विवाद पर हो सकती है चर्चा
दोनों नेताओं की बैठक में सीमा विवाद, व्यापार, निवेश और आपसी आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठ सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। निवेश संबंधी नियम, वीजा में देरी और चीन से भारत आने वाले औद्योगिक उपकरणों पर प्रतिबंध जैसी समस्याएं कारोबारी संबंधों की गति को प्रभावित कर रही हैं।
भारत और चीन के रिश्तों में सुधार के संकेतों के बावजूद दोनों देशों के बीच रणनीतिक मतभेद पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। ऐसे में शी की भारत यात्रा को केवल ब्रिक्स बैठक तक सीमित न देखकर द्विपक्षीय संबंधों में संभावित नई शुरुआत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
ब्रिक्स में वैश्विक मुद्दों पर भी नजर
भारत की मेजबानी में होने वाले सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, भू-राजनीतिक तनाव और बहुपक्षीय सहयोग सहित कई मुद्दों पर चर्चा होगी। रूस, ईरान और अन्य सदस्य देशों के नेताओं की मौजूदगी के बीच भारत के लिए ब्रिक्स की एकजुटता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होगी।
शी जिनपिंग की मौजूदगी से सम्मेलन का कूटनीतिक महत्व और बढ़ गया है। खासकर मोदी-शी मुलाकात पर भारत-चीन संबंधों की आगे की दिशा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रहेगी।





