हल्द्वानी। सरकार की आमद मरहबा, आका की आमद मरहबा…” बुधवार को इन सदाओं ने बनभूलपुरा की फिजां में ऐसी मिठास घोली कि गलियां नातों की आवाज, रोशनी की चमक और मोहब्बत के पैगाम से जगमगा उठीं। जश्ने ईद मिलादुन्नबी के मौके पर निकला भव्य जुलूस देखते ही देखते जनसैलाब में तब्दील हो गया। हजारों लोग नात-ए-पाक पढ़ते और हुजूर पैगंबर मोहम्मद साहब की शान में सदाएं बुलंद करते हुए आगे बढ़े। जुलूस में जहां धार्मिक उल्लास नजर आया, वहीं अमन, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम भी गूंजता रहा।
नातों की गूंज में सजा शहर, हर तरफ नजर आई रौनक
बुधवार सुबह से ही मुजाहिद चौक पर लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। कुछ ही देर में चौक लोगों से भर गया। इसके बाद जुलूस की शक्ल में कारवां इंदिरानगर बड़ी रोड से छोटी रोड, लाइन नंबर 12 और 16 होते हुए ईदगाह पहुंचा। यहां से जमा मस्जिद के सामने से गुजरता हुआ जुलूस किदवई नगर पहुंचा, लाइन नंबर 17 स्थित मुजाहिद चौक पर दुआ और सलाम के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
जुलूस के दौरान नात-ए-पाक की सदाओं से माहौल भक्तिमय बना रहा। बुजुर्गों से लेकर युवा और बच्चे तक उत्साह के साथ जुलूस में शामिल हुए।
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जहां से गुजरा कारवां, वहां बिखरी मेहमाननवाजी
जुलूस के रास्ते में जगह-जगह लोगों ने स्वागत स्टॉल लगाए। जुलूस में शामिल लोगों को फल, पानी और अन्य खाद्य सामग्री वितरित की गई। राहगीरों और जुलूस में शामिल लोगों के बीच यह मेहमाननवाजी पूरे आयोजन की खूबसूरत तस्वीर बन गई। चेहरे पर मुस्कान और जुबां पर नात—पूरा माहौल मोहब्बत के रंग में रंगा नजर आया।
बॉक्स दुआ में उठे हजारों हाथ, अमन के लिए मांगी फरियाद
किदवई नगर में जुलूस के समापन के दौरान मौलानाओं ने देश और प्रदेश में अमन-चैन, खुशहाली, भाईचारे और आपसी सौहार्द की दुआ कराई। हजारों लोगों ने एक साथ हाथ उठाकर मुल्क की तरक्की और समाज में शांति कायम रहने की दुआ मांगी।
दूधिया रोशनी में जगमगाया बनभूलपुरा
जश्ने ईद मिलादुन्नबी को लेकर बनभूलपुरा क्षेत्र को आकर्षक रोशनी और सजावट से सजाया गया। शाम ढलते ही पूरा इलाका दूधिया रोशनी में नहा उठा। सजी गलियां और रोशन रास्ते त्योहार की रौनक को कई गुना बढ़ाते नजर आए।
रहमत और इंसानियत का पैगाम लेकर आए थे हजरत मोहम्मद
जश्ने ईद मिलादुन्नबी हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिवस की याद में मनाया जाता है। इस्लामी परंपरा में उन्हें अंतिम पैगंबर माना जाता है। उनका जीवन सत्य, दया, इंसाफ, सब्र, इंसानियत और जरूरतमंदों की मदद जैसे संदेशों के लिए जाना जाता है। उनके पैगाम में पड़ोसी के अधिकार, गरीबों और कमजोरों के प्रति संवेदना तथा समाज में शांति और भाईचारे पर विशेष जोर मिलता है।
इसी संदेश को याद करते हुए जुलूस में शामिल लोगों ने भी मोहब्बत, भाईचारे और अमन को समाज की सबसे बड़ी जरूरत बताया।
राजनीतिक-सामाजिक हस्तियों ने भी की शिरकत
जश्ने ईद मिलादुन्नबी के जुलूस में समाजवादी पार्टी नेता हाजी अब्दुल मतीन सिद्दीकी, विधायक सुमित हृदयेश, ललित जोशी, मजहर नवाब, नईम सहित बड़ी संख्या में राजनीतिक और सामाजिक लोग शामिल हुए। लोगों ने एक-दूसरे को जश्ने ईद मिलादुन्नबी की मुबारकबाद दी और आयोजन की सफलता की कामना की।
चप्पे-चप्पे पर पुलिस, व्यवस्था पर रही पैनी नजर
जुलूस को लेकर पुलिस-प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट रहा। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर मार्ग में जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों ने जुलूस के पूरे मार्ग पर नजर रखी, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
नातों के साथ गूंजा एकता का संदेश
इस बार जश्ने ईद मिलादुन्नबी के जुलूस की खास तस्वीर यह भी रही कि धार्मिक उल्लास के साथ सामाजिक सौहार्द का संदेश प्रमुखता से सामने आया। नातों की आवाज के बीच बार-बार अमन और भाईचारे की बात होती रही।
“दिलों में प्यार रहे, हर जुबां पर सलाम रहे,
मेरे मुल्क की फिजां में सदा अमन का पैगाम रहे।”





