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शिक्षा, संगठन और संघर्ष के संदेश से गूंजा हल्द्वानी

मुंशी हरि प्रसाद टम्टा की 139वीं जयंती पर तिकोनिया में उमड़ा जनसैलाब, सामाजिक एकता का लिया संकल्प

हल्द्वानी। दलित पुनर्जागरण के अग्रदूत और बहुजन नायक राय बहादुर मुंशी हरि प्रसाद टम्टा की 139वीं जयंती पर बुधवार को तिकोनिया स्थित मुंशी हरि प्रसाद टम्टा पार्क में श्रद्धा और उत्साह का माहौल रहा। बड़ी संख्या में जुटे लोगों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उनके संघर्षों और सामाजिक योगदान को याद किया।

कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट गंगा प्रसाद ने किया। वक्ताओं ने कहा कि 26 अगस्त 1887 को अल्मोड़ा के एक गरीब शिल्पकार परिवार में जन्मे मुंशी हरि प्रसाद टम्टा ने उस दौर में समाज को नई दिशा देने का काम किया, जब शिल्पकार समाज सामाजिक भेदभाव और बेगार जैसी कुप्रथाओं से जूझ रहा था। उन्होंने शिक्षा को मुक्ति, संगठन को ताकत और संघर्ष को बदलाव का माध्यम बनाया।

वक्ताओं ने उनके ऐतिहासिक योगदानों को याद करते हुए बताया कि वर्ष 1905 में टम्टा सुधार सभा और बाद में कुमाऊं शिल्पकार सभा की स्थापना कर उन्होंने समाज को संगठित किया। शिल्पकार शब्द को सामाजिक पहचान दिलाने के साथ ही उन्होंने बेगार प्रथा के खिलाफ भी आवाज बुलंद की।

सभा में यह भी बताया गया कि वर्ष 1920 में उन्होंने कुमाऊं की पहली मोटर ट्रांसपोर्ट कंपनी ‘हिल मोटर्स ट्रांसपोर्ट कंपनी’ की स्थापना की। अल्मोड़ा म्युनिसिपल बोर्ड में शिल्पकार समाज को प्रतिनिधित्व दिलाना भी उनके संघर्षों की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। वक्ताओं ने विशेष रूप से उस प्रसंग को याद किया, जब बोर्ड में उनके प्रवेश का विरोध हुआ और मुस्लिम समुदाय के अंसारी जी ने उनके समर्थन में हाथ उठाया था।

वक्ताओं ने कहा कि मुंशी हरि प्रसाद टम्टा का जीवन सामाजिक विषमता के बीच संघर्ष, शिक्षा और संगठन की शक्ति का उदाहरण है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के पूना पैक्ट के समर्थन में वर्ष 1931 में उनके द्वारा तार भेजे जाने का भी उल्लेख किया गया।

कार्यक्रम में श्रीमती राधा आर्य, हरि प्रसाद टम्टा, डॉ. प्रमोद कुमार, बीएल आर्य, भीम आर्मी जिलाध्यक्ष नफीस अहमद खान, जीआर टम्टा, डॉ. कर्नल ज्ञान चंद, एडवोकेट संजय बगड़वाल, आरपी गंगोला, आफताब आलम, आकाश भारती, कैप्टन हरीश चंद्र, विनोद कुमार पन्नू, शुभता, दीपू, राम देवी, सुमन टम्टा, दीपक चैनियल, जितेंद्र वर्मा, आरआर आर्य, गोपाल ग्वासकोटी, जीवन चंद्र आर्य समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम के अंत में शिक्षा, संगठन और संघर्ष के रास्ते पर चलने तथा समाज में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव को समाप्त करने का सामूहिक संकल्प लिया गया।

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