नई दिल्ली/काठमांडू, एजेंसी। नेपाल की राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के प्रमुख और पूर्व उपप्रधानमंत्री रवि लामिछाने के जल्द ही भारत दौरे की संभावना जताई जा रही है। यह दौरा ऐसे समय पर चर्चा में है जब भारत-नेपाल संबंधों में लिपुलेख क्षेत्र को लेकर तनाव और कूटनीतिक बातचीत का दौर जारी है।
सूत्रों के अनुसार, रवि लामिछाने को भारत सरकार की ओर से एक उच्च स्तरीय बैठक या कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया जा सकता है। हालांकि अभी तक इस यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने के प्रयासों के बीच इस संभावित दौरे को अहम माना जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि यह प्रस्तावित यात्रा भारत और नेपाल के बीच चल रहे सीमा विवाद, विशेषकर लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा जैसे क्षेत्रों को लेकर चल रही चर्चा के बीच कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। हाल के महीनों में दोनों देशों ने बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने पर जोर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दौरा होता है तो यह न केवल राजनीतिक संवाद को मजबूत करेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में भी एक कदम हो सकता है। साथ ही, यह यात्रा क्षेत्रीय सहयोग और सीमा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा का अवसर प्रदान कर सकती है।
हालांकि, नेपाल में इस संभावित दौरे को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ इसे सकारात्मक कूटनीतिक पहल मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे संवेदनशील सीमा मुद्दों के संदर्भ में सतर्कता से देख रहे हैं।
भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में सीमा विवादों के चलते कुछ तनाव की स्थिति भी बनी है। ऐसे में किसी भी उच्च स्तरीय राजनीतिक दौरे को दोनों देशों के संबंधों में अहम माना जाता है।





