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होर्मुज संकट के बीच ब्रिटिश नौसेना तैयार, माइन-डिस्पोज़ल मिशन की तैयारी तेज

लंदन/नई दिल्ली, एजेंसी। मध्य पूर्व में तनाव और संभावित अमेरिका–ईरान शांति समझौते की चर्चाओं के बीच ब्रिटेन की रॉयल नेवी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संभावित माइन-क्लियरिंग अभियान की तैयारी तेज कर दी है। यह वही समुद्री मार्ग है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

रिपोर्टों के अनुसार, ब्रिटिश नौसेना का लैंडिंग शिप RFA Lyme Bay और उसके साथ जुड़े कर्मी और उपकरण जिब्राल्टर के पास तैनात हैं। जहाज पर माइन-डिटेक्शन के लिए आधुनिक सोनार ड्रोन, अंडरवॉटर सर्विलांस सिस्टम और रिमोट-ऑपरेटेड उपकरण लोड किए जा रहे हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, यह मिशन अभी सक्रिय नहीं किया गया है और इसे केवल तभी शुरू किया जाएगा जब क्षेत्र में संघर्ष समाप्त होने और संभावित शांति समझौते की पुष्टि हो जाएगी। इस ऑपरेशन में ब्रिटेन के साथ फ्रांस और अन्य सहयोगी देशों के शामिल होने की भी संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अगर समुद्री बारूदी सुरंगें (माइन्स) मौजूद रहीं, तो उन्हें हटाना अत्यंत जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया होगी। आधुनिक तकनीक और ड्रोन के बावजूद पूरा क्षेत्र सुरक्षित करने में महीनों का समय लग सकता है।

यह तैयारी ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और शांति समझौते की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि अभी तक किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तैयारियां वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों को खुला रखने की रणनीति का हिस्सा हैं।

ब्रिटिश नौसेना ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी भी सैन्य टकराव को बढ़ाना नहीं, बल्कि शांति स्थापित होने के बाद समुद्री मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बनाना है।

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