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धार की भोजशाला में वाग्देवी प्रतिमा की वापसी के लिए भारत ने तेज किए प्रयास, ब्रिटेन से शुरू हुई कूटनीतिक पहल

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला की वाग्देवी (सरस्वती) प्रतिमा को ब्रिटेन से भारत वापस लाने के लिए केंद्र सरकार ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। सरकार ने प्रतिमा की वापसी को लेकर ब्रिटेन के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत शुरू की है। यह पहल मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले के बाद तेज हुई है, जिसमें भोजशाला को वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर माना गया था और केंद्र सरकार से प्रतिमा की वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाने पर विचार करने को कहा गया था।

यह 11वीं शताब्दी की प्राचीन प्रतिमा वर्तमान में लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में सुरक्षित है। माना जाता है कि इसे औपनिवेशिक काल में भारत से ले जाया गया था। प्रतिमा को राजा भोज के काल की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर माना जाता है और लंबे समय से इसकी स्वदेश वापसी की मांग उठती रही है।

सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार इस मामले में अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत संरक्षण संबंधी प्रावधानों और भारत-ब्रिटेन के बीच उपलब्ध कूटनीतिक माध्यमों का सहारा ले रही है। सरकार का उद्देश्य ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाली इस प्रतिमा को उसके मूल स्थल भोजशाला में स्थापित कराना है।

भोजशाला को लेकर वर्षों से विवाद चलता रहा है। हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के बाद हिंदू पक्ष ने वाग्देवी प्रतिमा की वापसी की मांग को और तेज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह प्रतिमा केवल एक पुरातात्विक धरोहर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रतिमा भारत लौटती है तो यह केवल एक ऐतिहासिक धरोहर की वापसी नहीं होगी, बल्कि औपनिवेशिक काल में विदेश ले जाई गई भारतीय सांस्कृतिक संपदाओं को वापस लाने के अभियान में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है। हालांकि, ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रियाओं और संबंधित संस्थाओं की सहमति आवश्यक होती है, इसलिए पूरी प्रक्रिया में समय लग सकता है।

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