जिनेवा। स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र (UN) के पहले वैश्विक एआई गवर्नेंस डायलॉग में भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने किया। यह उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय बैठक 6-7 जुलाई को आयोजित की जा रही है, जिसमें दुनिया भर के देशों के प्रतिनिधि, विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल हो रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह वैश्विक मंच कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार उपयोग को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इस डायलॉग में एआई से जुड़े सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, डिजिटल विभाजन को कम करने, मानवाधिकारों की सुरक्षा और भरोसेमंद तकनीक के विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जा रही है।
इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल ऑन एआई (IISPA) की पहली वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जा रही है, जिसमें एआई की संभावनाओं और चुनौतियों का आकलन शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर एआई नीतियों को दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगी।
डायलॉग के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधि इस बात पर विचार-विमर्श कर रहे हैं कि कैसे एआई तकनीक का उपयोग सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में किया जा सकता है, साथ ही इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए मजबूत वैश्विक ढांचा तैयार किया जा सके।
भारत ने इस मंच पर जिम्मेदार और समावेशी एआई विकास के दृष्टिकोण को साझा किया और वैश्विक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यह भी रेखांकित किया कि विकासशील देशों को एआई तकनीक तक समान और सुलभ पहुंच मिलनी चाहिए।
कुल मिलाकर, यह सम्मेलन वैश्विक एआई शासन व्यवस्था को आकार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसमें भारत की सक्रिय भागीदारी को अहम बताया जा रहा है।





