नई दिल्ली/वॉशिंगटन। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने ग्रीन कार्ड धारकों (स्थायी निवासियों) के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा को पहले से अधिक जोखिमपूर्ण बना दिया है। अदालत ने 6-3 के बहुमत से दिए गए अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि सीमा पर तैनात अधिकारी किसी ग्रीन कार्ड धारक को “अमेरिका में प्रवेश चाहने वाला यात्री” मान सकते हैं, यदि उसके खिलाफ आपराधिक आरोप या संदेह मौजूद हो, भले ही दोष सिद्ध न हुआ हो।
यह मामला ‘ब्लांश बनाम लाउ’ (Blanche v. Lau) से जुड़ा है, जिसमें एक ग्रीन कार्ड धारक पर नकली सामान (counterfeit goods) से जुड़े आरोप लगे थे। अदालत ने कहा कि सीमा सुरक्षा अधिकारियों को ऐसे मामलों में व्यक्ति को स्वचालित रूप से प्रवेश की अनुमति देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
इस निर्णय के बाद यदि कोई ग्रीन कार्ड धारक विदेश यात्रा करता है और उसके खिलाफ किसी प्रकार का आपराधिक मामला, आरोप या जांच लंबित है, तो उसे अमेरिका लौटने पर हिरासत, पूछताछ या अस्थायी रिहाई (parole) का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही ऐसे मामलों में व्यक्ति पर “अस्वीकार्य (inadmissible)” की श्रेणी में कार्रवाई भी हो सकती है।
अदालत के बहुमत ने माना कि आव्रजन अधिकारियों को सीमा पर प्रारंभिक निर्णय लेने के लिए “कठोर प्रमाण” की आवश्यकता नहीं है। वहीं, इस फैसले के विरोध में जस्टिस केतनजी ब्राउन जैक्सन सहित तीन न्यायाधीशों ने असहमति जताते हुए कहा कि यह निर्णय स्थायी निवासियों को अनिश्चितता और कानूनी असुरक्षा की स्थिति में डाल सकता है।
आव्रजन विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जिनके खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला लंबित है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि ऐसे ग्रीन कार्ड धारकों को विदेश यात्रा से पहले कानूनी सलाह लेनी चाहिए।
विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से अमेरिकी आव्रजन प्रणाली में सीमा अधिकारियों की शक्ति बढ़ेगी, जबकि ग्रीन कार्ड धारकों की सुरक्षा और अधिकारों पर नया दबाव उत्पन्न होगा।
कुल मिलाकर, यह फैसला ग्रीन कार्ड धारकों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि अब केवल कानूनी स्थिति ही नहीं, बल्कि यात्रा इतिहास और लंबित आरोप भी उनकी अमेरिका वापसी को प्रभावित कर सकते हैं।





