तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) द्वारा अपने परमाणु स्थलों के निरीक्षण को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका के साथ कोई अंतिम परमाणु समझौता नहीं हो जाता, तब तक वह अपने संवेदनशील परमाणु ठिकानों पर IAEA को निरीक्षण की अनुमति नहीं देगा।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, किसी भी प्रकार का निरीक्षण या पहुंच “अंतिम समझौते और आवश्यक शर्तों की स्पष्टता” के बाद ही संभव होगी। इससे पहले किसी भी बाहरी निरीक्षण को अनुमति देना देश की सुरक्षा और संप्रभुता के खिलाफ होगा।
IAEA और अमेरिका के दावे पर टकराव
यह बयान ऐसे समय आया है जब IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं के तहत परमाणु निरीक्षण जल्द शुरू हो सकते हैं। हालांकि ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि अभी किसी नए निरीक्षण समझौते पर सहमति नहीं बनी है।
ईरान का कहना है कि वह केवल मौजूदा अंतरराष्ट्रीय नियमों और पहले से तय सुरक्षा ढांचे के तहत ही सहयोग जारी रखेगा, लेकिन अतिरिक्त या विशेष निरीक्षण शर्तों को स्वीकार नहीं करेगा।
परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ा तनाव
पिछले कुछ वर्षों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश आशंका जताते हैं कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सैन्य उद्देश्य की ओर ले जा सकता है, जबकि तेहरान लगातार इसे शांतिपूर्ण ऊर्जा जरूरतों के लिए बताता रहा है।
हाल के महीनों में हुए कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद दोनों पक्षों के बीच निरीक्षण, प्रतिबंध हटाने और यूरेनियम संवर्धन सीमा जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ईरान और अमेरिका के बीच व्यापक और अंतिम समझौता नहीं होता, तब तक IAEA निरीक्षण को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी। इससे परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी और पारदर्शिता की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल ईरान के इस रुख ने परमाणु वार्ता प्रक्रिया को एक बार फिर जटिल बना दिया है और मध्य पूर्व में कूटनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।




