देहरादून: बहुप्रतीक्षित कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए कार्यक्रम और शुल्क संरचना जारी कर दी गई है। विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित इस आध्यात्मिक यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है। कई वर्षों के व्यवधान के बाद यात्रा के नियमित संचालन की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जारी कार्यक्रम के अनुसार यात्रा दो प्रमुख मार्गों—उत्तराखंड स्थित लिपुलेख दर्रा और सिक्किम के नाथूला मार्ग—से संचालित की जाएगी। यात्रियों का चयन ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, जिसके बाद मेडिकल परीक्षण और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
यात्रा का कुल खर्च मार्ग के अनुसार अलग-अलग निर्धारित किया गया है। लिपुलेख मार्ग अपेक्षाकृत कठिन लेकिन पारंपरिक माना जाता है, जबकि नाथूला मार्ग अपेक्षाकृत सुविधाजनक विकल्प के रूप में देखा जाता है। यात्रा शुल्क में आवास, भोजन, स्थानीय परिवहन, चिकित्सा सुविधा और प्रशासनिक व्यवस्थाएँ शामिल रहेंगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यात्रा दलों को चरणबद्ध तरीके से रवाना किया जाएगा और प्रत्येक बैच में सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को शामिल किया जाएगा, ताकि सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। उच्च हिमालयी क्षेत्र होने के कारण यात्रियों के लिए शारीरिक रूप से फिट होना अनिवार्य रखा गया है।
उत्तराखंड सरकार ने भी यात्रा को लेकर स्थानीय स्तर पर तैयारियाँ तेज कर दी हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू, बौद्ध और जैन श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के धाम माने जाने वाले कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील के दर्शन के लिए आवेदन करते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यात्रा से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश और आवेदन तिथियाँ जल्द आधिकारिक पोर्टल पर जारी की जाएंगी।
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का कार्यक्रम और शुल्क जारी, आवेदन प्रक्रिया जल्द शुरू





