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एल नीनो का असर बढ़ा: मानसून में बारिश पर पड़ सकता है बड़ा प्रभाव, IMD की चेतावनी

नई दिल्ली, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान एल नीनो (El Niño) की स्थिति और मजबूत हो सकती है, जिससे देश में मानसूनी वर्षा प्रभावित होने की आशंका है। यह स्थिति कृषि, जल संसाधन और अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती है।

IMD के अनुसार, प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्री सतह के तापमान में वृद्धि के कारण एल नीनो की सक्रियता बढ़ रही है। यह मौसमीय घटना सामान्यतः भारत में मानसूनी हवाओं को कमजोर करती है, जिससे वर्षा में कमी देखने को मिलती है।

मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि इस वर्ष मानसून सामान्य से कम रह सकता है। कई क्षेत्रों में वर्षा वितरण असमान हो सकता है। जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश में कमी का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है, जिससे धान, दलहन, तिलहन और अन्य फसलों की पैदावार प्रभावित होने की संभावना है।

मानसून भारत की कृषि व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। देश की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। ऐसे में कमजोर मानसून से उत्पादन घटने, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बारिश में कमी होती है तो सिंचाई पर निर्भरता बढ़ेगी और जलाशयों का स्तर भी प्रभावित हो सकता है।

एल नीनो की स्थिति के चलते केंद्र और राज्य सरकारों के सामने जल प्रबंधन और कृषि योजना को लेकर नई चुनौतियाँ खड़ी हो सकती हैं। वहीं किसानों को भी मौसम के उतार-चढ़ाव को देखते हुए फसल योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

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