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उषा मंगेशकर को मिलेगा पहला भूपेन हजारिका राष्ट्रीय पुरस्कार, 29 नवंबर को पीएम मोदी करेंगे सम्मानित

गुवाहाटी। असम सरकार ने प्रख्यात पार्श्व गायिका उषा मंगेशकर को पहले ‘भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका राष्ट्रीय पुरस्कार’ से सम्मानित करने की घोषणा की है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 29 नवंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित समारोह में उषा मंगेशकर को यह सम्मान प्रदान करेंगे। यह कार्यक्रम महान गायक और संगीतकार भूपेन हजारिका की जन्मशताब्दी समारोहों के समापन अवसर पर आयोजित किया जाएगा।

असम मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को इस राष्ट्रीय पुरस्कार की स्थापना को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित करना तथा भूपेन हजारिका की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना है।

हर तीन साल में दिया जाएगा पुरस्कार

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, यह पुरस्कार हर तीन साल में संगीत, कला या सिनेमा के क्षेत्र में राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली किसी प्रतिष्ठित हस्ती को दिया जाएगा। पुरस्कार के तहत 10 लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाएगा।

उषा मंगेशकर का चयन भारतीय संगीत में उनके योगदान और भूपेन हजारिका की संगीत रचनाओं से उनके जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

29 नवंबर को होगा जन्मशताब्दी समारोह का समापन

भूपेन हजारिका की जन्मशताब्दी के उपलक्ष्य में सालभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का समापन 29 नवंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा। समारोह में देशभर की प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है। इस आयोजन के माध्यम से भूपेन हजारिका के संगीत, साहित्य और सांस्कृतिक योगदान को याद किया जाएगा।

2019 में मिला था भारत रत्न

भूपेन हजारिका का जन्म 8 सितंबर 1926 को असम के सादिया में हुआ था। वे प्रख्यात गायक, संगीतकार, गीतकार और फिल्म निर्माता थे। उनकी रचनाओं में मानवता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक एकता का संदेश प्रमुखता से दिखाई देता है। पांच नवंबर 2011 को मुंबई में उनका निधन हो गया था। भारतीय संगीत और संस्कृति में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2019 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

असम सरकार की ओर से शुरू किया गया यह राष्ट्रीय पुरस्कार उनकी कला और सांस्कृतिक विरासत को देशभर में सम्मान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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