देहरादून, 2 सितंबर। उत्तराखंड में पर्वतीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं को गति देने की कवायद तेज हो गई है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बुधवार को प्रदेश में संचालित और प्रस्तावित विभिन्न रोपवे परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को लंबित प्रक्रियाओं, भूमि संबंधी मामलों और आपसी समन्वय से जुड़े मुद्दों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में रोपवे कनेक्टिविटी पर्यटन और यातायात व्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में धरातल पर उतारने के साथ गुणवत्ता और बेहतर समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने ब्रिडकुल को रोपवे परियोजनाओं के प्रभावी संचालन और नियमन के लिए रोपवे रेग्यूलेशन और नियम जल्द जारी करने के निर्देश भी दिए।
केदारनाथ और हेमकुंड साहिब परियोजनाओं की समीक्षा
बैठक में केदारनाथ धाम और हेमकुंड साहिब रोपवे की प्रगति की भी समीक्षा हुई। मुख्य सचिव ने संबंधित एजेंसियों को आगामी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन और कार्यदायी संस्था के बीच बेहतर तालमेल के लिए नोडल अधिकारी नामित करने को कहा गया।
नैनीताल क्षेत्र की परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान रानीबाग-ज्योलीकोट-हनुमानगढ़ी-कैंचीधाम तथा रानीबाग-भीमताल-भवाली रोपवे परियोजनाओं के बीच आवश्यक इंटीग्रेशन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही अंतिम मंजूरी, डीपीआर और डीएफसी से जुड़ी प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए।
भूमि संबंधी मामलों का जल्द होगा समाधान
मुख्य सचिव ने जोशीमठ-औली-गोरसों, रैथल-बारसू और पुरकुल रोपवे परियोजनाओं की भी समीक्षा की। इसके अलावा यमुनोत्री-जानकी चट्टी, हनुमानचट्टी-पूर्णागिरि और तपोवन-कुंजपुरा परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई।
उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को भूमि संबंधी मामलों का शीघ्र निस्तारण करने और लंबित प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी रोकने के निर्देश दिए। साथ ही रोपवे परियोजनाओं में पार्किंग सुविधा को अनिवार्य रूप से शामिल करने को कहा, ताकि पर्यटकों और स्थानीय लोगों को बेहतर यातायात सुविधा मिल सके।





