पीजी प्रवेश की अंतिम तारीख सिर पर, एमबीपीजी में फूटा गुस्सा; विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी
हल्द्वानी। सेमेस्टर परीक्षाएं खत्म हुए करीब दो महीने गुजर गए, लेकिन कुमाऊं विश्वविद्यालय की सुस्ती ने हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटका दिया है। स्नातक द्वितीय व चतुर्थ सेमेस्टर के साथ बैक परीक्षाओं के परिणाम अब तक जारी नहीं होने से बुधवार को एमबीपीजी कॉलेज में छात्रों का सब्र जवाब दे गया। आक्रोशित छात्र प्राचार्य कक्ष की छत पर चढ़ गए और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
छात्रों का कहना था कि रिजल्ट में देरी का सीधा असर उनके आगे की पढ़ाई पर पड़ रहा है। एनएसयूआई से जुड़े मेहुल साह ने आरोप लगाया कि बैक परीक्षा का परिणाम नहीं आने से कई विद्यार्थी पीजी कक्षाओं में प्रवेश के लिए आवेदन तक नहीं कर पा रहे हैं। चार सितंबर आवेदन की अंतिम तिथि है, जबकि कई विषयों में सीटें पहले ही भर चुकी हैं। ऐसे में परिणाम जारी होने में और देरी हुई तो बड़ी संख्या में छात्र पीजी प्रवेश की दौड़ से बाहर हो सकते हैं।
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही कॉलेज परिसर में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। प्राचार्य प्रो. एनएस बनकोटी सहित शिक्षकों ने छात्रों को समझाने और छत से नीचे उतारने का प्रयास किया, लेकिन छात्र तत्काल रिजल्ट जारी करने की मांग पर अड़े रहे।
मुक्त विश्वविद्यालय पहुंचे एबीवीपी कार्यकर्ता
उधर, एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय पहुंचकर कुमाऊं विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी को ज्ञापन सौंपा। कार्यकर्ताओं ने लंबित परीक्षा परिणाम जल्द घोषित करने की मांग करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की देरी का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
छात्रों का सवाल—रिजल्ट नहीं तो दाखिला कैसे?
परीक्षा परिणाम को लेकर छात्रों में सबसे बड़ा सवाल पीजी प्रवेश को लेकर है। आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक है और कई संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय की देरी से यदि उनका दाखिला छूटता है तो इसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?





