नई दिल्ली, 2 सितंबर। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कई अहम निर्देश दिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने BCI के नीतिगत फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को सक्रिय रूप से शामिल करने का निर्देश दिया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि BCI के मौजूदा चेयरमैन फिलहाल प्रो-टेम चेयरमैन के तौर पर रोजमर्रा के कामकाज को संभालेंगे। नई BCI के गठन तक उनके अधिकार सीमित रहेंगे। अदालत ने कहा कि BCI के हर नीतिगत निर्णय में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
पांच साल के कार्यकाल पर उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने उस अधिसूचना पर सवाल उठाया, जिसके तहत BCI चेयरमैन और उपाध्यक्ष का कार्यकाल पांच साल किया गया था। न्यायमूर्ति बागची ने पूछा कि आखिर किस कानूनी प्रावधान के तहत पांच साल का कार्यकाल निर्धारित किया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने बताया कि BCI नियमों के नियम 12(2) के अनुसार चेयरमैन और उपाध्यक्ष का कार्यकाल दो साल निर्धारित है। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि कोई अधिसूचना नियमों को पीछे नहीं छोड़ सकती।
याचिकाओं में मनन कुमार मिश्रा के लंबे समय से पद पर बने रहने को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने BCI में नए सिरे से चुनाव कराने, कार्यकाल की सीमा तय करने और संस्था के कामकाज में अधिक पारदर्शिता की मांग की है।
राज्य बार काउंसिल के चुनाव पर भी जोर
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिलों के गठन और चुनाव की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के लिए समयसीमा तय करने के निर्देश दिए हैं। अदालत का मानना है कि राज्य बार काउंसिलों के चुनाव पूरे होने के बाद नई BCI के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।





