नई दिल्ली। आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) में लंबे समय से खाली पड़े पदों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण न्यायिक संस्थान में वर्षों तक पद रिक्त रहना चिंता का विषय है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से भी मामले में सहायता मांगी। अदालत ने निर्देश दिया कि रिक्त पदों को जल्द भरने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि आईटीएटी में रजिस्ट्रार, सहायक रजिस्ट्रार समेत कई प्रशासनिक और न्यायिक पद वर्षों से खाली पड़े हैं। इससे मामलों के निपटारे पर गंभीर असर पड़ रहा है और करदाताओं को न्याय मिलने में देरी हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि इतने लंबे समय तक पद खाली रहने की स्थिति स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने अंतरिम व्यवस्था के तौर पर हाई कोर्टों से न्यायिक अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजने का सुझाव भी दिया, ताकि न्यायाधिकरण का कामकाज प्रभावित न हो।
यह जनहित याचिका आईटीएटी के पूर्व उपाध्यक्ष परवीन कुमार बंसल की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि देशभर की विभिन्न पीठों में सदस्यों और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण हजारों कर मामलों की सुनवाई लंबित है।
आईटीएटी देश का प्रमुख कर अपीलीय मंच है, जहां आयकर से जुड़े मामलों की सुनवाई होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिक्त पदों के कारण कर विवादों के निपटारे में देरी से राजस्व संग्रह और न्यायिक प्रक्रिया दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप को न्यायिक संस्थानों की कार्यक्षमता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई जल्द होने की संभावना है।






