देहरादून। उत्तराखंड में आपदा के कारण जरूरी दस्तावेज खो चुके लोगों के लिए राहत की खबर है। निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि दस्तावेजों के नष्ट होने या खो जाने की स्थिति में किसी भी पात्र नागरिक का मतदान अधिकार प्रभावित नहीं होगा। ऐसे मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल रखने के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी।
राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के दौरान कई क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों की समस्याएं सामने आई हैं। कई लोगों के पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी कागजात आपदा में नष्ट हो गए हैं। निर्वाचन अधिकारियों ने कहा है कि केवल दस्तावेज उपलब्ध न होने के आधार पर किसी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, मतदाता की पहचान और पात्रता की पुष्टि के लिए वैकल्पिक माध्यमों का सहारा लिया जाएगा। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) प्रभावित क्षेत्रों में मतदाताओं से संपर्क कर स्थिति का सत्यापन करेंगे और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आपदा प्रभावित नागरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर न हों।
उत्तराखंड में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के तहत मतदाताओं के नाम, पते और अन्य विवरणों का सत्यापन किया जा रहा है। ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद मतदाताओं को अपने नाम की जांच करने और किसी भी त्रुटि की स्थिति में सुधार कराने का अवसर दिया जा रहा है।
निर्वाचन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे मतदाता सूची में अपना नाम जरूर जांच लें और किसी भी समस्या की स्थिति में संबंधित BLO या निर्वाचन कार्यालय से संपर्क करें। अधिकारियों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और समावेशी बनाए रखने के लिए सभी पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की जाएगी।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में यह पहल उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो दस्तावेजों के नुकसान के कारण अपने मतदान अधिकार को लेकर चिंतित थे। निर्वाचन विभाग के इस आश्वासन से ऐसे मतदाताओं को बड़ी राहत मिली है।





