वॉशिंगटन: अमेरिका में ट्रक ड्राइवरों की कमी को पूरा करने और वाणिज्यिक परिवहन क्षेत्र में सुरक्षा नियमों को सख्त करने के लिए सरकार ने पूर्व सैन्यकर्मियों को ट्रक ड्राइविंग के क्षेत्र में लाने की योजना शुरू की है। यह कदम उन प्रवासी ट्रक ड्राइवरों के खिलाफ कार्रवाई के बाद उठाया गया है, जिनके लाइसेंस नियमों के उल्लंघन के चलते रद्द किए गए हैं।
अमेरिकी प्रशासन ने पूर्व सैनिकों को कमर्शियल ट्रक ड्राइवर बनने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “Freedom Haulers” अभियान शुरू किया है। इसके तहत सेना में भारी वाहन चलाने का अनुभव रखने वाले जवानों को कमर्शियल ड्राइवर लाइसेंस (CDL) हासिल करने की प्रक्रिया में राहत देने की योजना है।
अधिकारियों के अनुसार, सेना से जुड़े कई कर्मियों के पास बड़े वाहनों को चलाने का अनुभव होता है। ऐसे पूर्व सैनिकों को CDL के लिए जरूरी प्रशिक्षण और प्रक्रियाओं में सहायता दी जाएगी। कुछ मामलों में सैन्य अनुभव के आधार पर ड्राइविंग टेस्ट में छूट और प्रशिक्षण के लिए सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिकी परिवहन विभाग ने कमर्शियल ड्राइवर लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया की समीक्षा तेज कर दी है। विभाग ने भाषा दक्षता, कानूनी स्थिति और लाइसेंस पात्रता से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं। इसके बाद हजारों प्रवासी ड्राइवरों के लाइसेंस प्रभावित हुए हैं।
सरकार का कहना है कि सड़क सुरक्षा को मजबूत करना और योग्य ड्राइवरों को उद्योग में लाना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। परिवहन मंत्री सीन डफी ने कहा कि योग्य और प्रशिक्षित ड्राइवरों की जरूरत को पूरा करने के लिए पूर्व सैनिकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
हालांकि, इस फैसले पर कुछ प्रवासी संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नियमों की सख्ती का असर कई ऐसे ड्राइवरों पर भी पड़ रहा है जो कानूनी रूप से काम कर रहे हैं। ट्रकिंग उद्योग में भारतीय मूल के ड्राइवरों की बड़ी संख्या होने के कारण इस नीति पर भारतवंशी समुदाय की भी नजर है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका का ट्रकिंग सेक्टर देश की सप्लाई चेन के लिए बेहद अहम है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती यह है कि सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के साथ-साथ उद्योग में पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित ड्राइवर भी उपलब्ध रहें।





