नई दिल्ली। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर उठे विवाद और बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा की अनिश्चितता, कोचिंग संस्थानों का बढ़ता दबाव और सफलता को लेकर परिवार व समाज की अपेक्षाएं छात्रों में तनाव, चिंता और भावनात्मक परेशानी को बढ़ा रही हैं।
NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र लंबे समय तक कठिन अध्ययन, लगातार टेस्ट, रैंक की चिंता और भविष्य को लेकर दबाव का सामना करते हैं। हाल के विवादों ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल, अनिश्चितता और बार-बार बदलती परिस्थितियों ने कई छात्रों के आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन को प्रभावित किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कोचिंग संस्कृति में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने छात्रों पर अतिरिक्त दबाव पैदा किया है। कई छात्र स्कूल शिक्षा के साथ-साथ कोचिंग, टेस्ट सीरीज और लगातार मूल्यांकन के चक्र में फंस जाते हैं। लंबे समय तक पढ़ाई, सीमित सामाजिक जीवन और असफलता का डर मानसिक थकान का कारण बन सकता है।
छात्रों पर अच्छे अंक और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का दबाव इतना बढ़ गया है कि कई बार उनकी व्यक्तिगत भावनाओं और मानसिक जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल परीक्षा परिणाम को सफलता का पैमाना मानने की सोच में बदलाव की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित राष्ट्रीय टास्क फोर्स ने भी छात्र मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है। रिपोर्ट में प्रतियोगी परीक्षाओं, कोचिंग दबाव, पाठ्यक्रम में बदलाव और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों को छात्रों की परेशानी के प्रमुख कारणों में शामिल किए जाने की संभावना है।
मनोविशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों को पढ़ाई के साथ मानसिक सहयोग, नियमित संवाद और तनाव प्रबंधन की सुविधा मिलनी चाहिए। अभिभावकों और शिक्षकों को भी छात्रों पर केवल परिणाम का दबाव डालने के बजाय उनकी भावनात्मक स्थिति को समझने की जरूरत है।
NEET विवाद ने एक बार फिर देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की चुनौतियों को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, कोचिंग व्यवस्था में सुधार और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना जरूरी है, ताकि छात्र केवल परीक्षा की दौड़ में नहीं बल्कि स्वस्थ वातावरण में अपने लक्ष्य की ओर बढ़ सकें।





