देहरादून। बदरीनाथ धाम में सुगम (VIP) दर्शन के लिए ₹1100 शुल्क निर्धारित किए जाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। श्रद्धालुओं के एक वर्ग ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, वहीं बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने इसे मंदिर व्यवस्था को सुचारु बनाने और भीड़ प्रबंधन के लिए जरूरी कदम बताया है।
मंदिर समिति की ओर से लागू की गई नई व्यवस्था के तहत सुगम दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को निर्धारित शुल्क देकर पर्ची प्राप्त करनी होगी। समिति का कहना है कि इससे लंबी कतारों में लगने वाले समय को कम किया जा सकेगा और बुजुर्गों, महिलाओं तथा स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी।
CEO ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था किसी विशेष व्यक्ति या वर्ग के लिए नहीं है, बल्कि सभी श्रद्धालुओं के लिए समान रूप से लागू होगी। उनका कहना है कि दर्शन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।
हालांकि, शुल्क को लेकर श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोगों का मानना है कि इससे भीड़ नियंत्रण में मदद मिलेगी, जबकि कई श्रद्धालु इसे धार्मिक दर्शन के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है।
मंदिर समिति का तर्क है कि बढ़ती तीर्थयात्रियों की संख्या और सीमित संसाधनों के बीच बेहतर प्रबंधन के लिए नई व्यवस्था आवश्यक है। वहीं विरोध करने वाले लोग मांग कर रहे हैं कि सामान्य दर्शन व्यवस्था सभी के लिए सरल और निशुल्क बनी रहनी चाहिए।
बदरीनाथ धाम उत्तराखंड के प्रमुख चारधाम तीर्थ स्थलों में शामिल है और हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में दर्शन शुल्क की नई व्यवस्था आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बनी रहने की संभावना है।





