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NEET पेपर लीक मामला: सरकार ने सिर्फ टेलीग्राम पर ही क्यों लगाया बैन, व्हाट्सएप और फेसबुक क्यों बचे? कारण आया सामने

नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले के बीच केंद्र सरकार द्वारा मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए जाने के बाद बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर केवल टेलीग्राम को ही क्यों निशाना बनाया गया, जबकि व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर कोई रोक नहीं लगाई गई।

सरकारी सूत्रों और संबंधित एजेंसियों के अनुसार, यह फैसला किसी एक ऐप को लेकर नहीं बल्कि उसके इस्तेमाल के तरीके और तकनीकी संरचना को ध्यान में रखकर लिया गया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत यह कार्रवाई की है।

टेलीग्राम क्यों बना कार्रवाई का केंद्र?

जांच एजेंसियों का कहना है कि टेलीग्राम पर बड़े पैमाने पर सार्वजनिक चैनल और ग्रुप आसानी से बनाए जा सकते हैं, जहां हजारों-लाखों यूजर्स को एक साथ संदेश भेजना संभव है। इसके अलावा, संदेश एडिट करने की सुविधा का कथित रूप से दुरुपयोग कर “फर्जी पेपर लीक” की अफवाहें और भ्रम फैलाने की कोशिश की गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, परीक्षा से पहले कुछ नेटवर्क टेलीग्राम के जरिए कथित पेपर बेचने, पैसे वसूलने और फर्जी प्रश्नपत्र फैलाने में सक्रिय पाए गए। इसी कारण इसे “संगठित नकल रैकेट” का प्रमुख माध्यम माना गया।

सरकार का तर्क है कि व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के कारण बड़े पैमाने पर सार्वजनिक प्रसार सीमित होता है। व्हाट्सएप मुख्यतः निजी चैट तक सीमित रहता है, जबकि टेलीग्राम में बड़े पब्लिक चैनल और अनलिमिटेड ब्रॉडकास्टिंग की सुविधा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, व्हाट्सएप में संदेश एडिटिंग पर समय सीमा होती है, जबकि टेलीग्राम में लंबे समय तक एडिट कर पुराने संदेशों को बदलकर भ्रम फैलाया जा सकता है।

सरकार ने अदालत में कहा है कि यह कदम छात्रों की सुरक्षा और परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए जरूरी था। सरकार का दावा है कि लाखों छात्रों को प्रभावित करने वाले परीक्षा पेपर लीक नेटवर्क को रोकने के लिए यह “अस्थायी लेकिन आवश्यक” कदम है।

हालांकि इस कार्रवाई पर बहस भी तेज हो गई है। डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने से असली समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि केवल तरीका बदल जाता है।

वहीं टेलीग्राम की ओर से भी इस कदम को चुनौती दी गई है और कहा गया है कि यह कार्रवाई उपयोगकर्ताओं की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित करती है।

 

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