नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में लगभग 40 जहाज, जिनमें कच्चे तेल और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) से भरे टैंकर शामिल हैं, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर भारत की ओर रवाना हो रहे हैं। यह विकास लंबे समय से जारी आपूर्ति बाधाओं के बाद भारत के लिए बड़ी राहत के संकेत दे रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कई महीनों से होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव और संघर्ष के कारण तेल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई थी। इससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों को ऊर्जा संकट और कीमतों में अस्थिरता का सामना करना पड़ा। विशेष रूप से LPG की आपूर्ति पर सबसे अधिक असर पड़ा था, जिससे घरेलू गैस सिलेंडर की उपलब्धता पर भी दबाव बढ़ गया था।
अब अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी शांति समझौते के बाद इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से आंशिक रूप से खोल दिया गया है। इससे कच्चे तेल और गैस से भरे जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में आपूर्ति श्रृंखला और अधिक स्थिर हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर भी असर पड़ेगा।
ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का एक प्रमुख मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल और LNG-एलपीजी का परिवहन होता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर भारत, चीन, जापान और अन्य एशियाई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।
भारत के लिए यह विकास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के संकट के दौरान आयात में भारी गिरावट देखी गई थी। कई टैंकरों के फंसे रहने और आपूर्ति बाधित होने के कारण ऊर्जा स्टॉक पर दबाव बढ़ गया था।
अब 40 जहाजों की संभावित आवाजाही को ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता लौटने के शुरुआती संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव पर नजर बनाए रखना आवश्यक होगा।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में पेट्रोलियम और गैस की आपूर्ति में सुधार और कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।





