नई दिल्ली/पेरिस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में पश्चिम एशिया की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और भारत-अमेरिका संबंधों से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार मार्गों पर असर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति होती है। दोनों देशों ने क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षित नौवहन की जरूरत पर जोर दिया।
G7 बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर कहा कि दुनिया के लिए भरोसा सबसे बड़ी रणनीतिक जरूरत है और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए खुले और सुरक्षित समुद्री रास्तों के महत्व को रेखांकित किया।
मोदी और ट्रंप की यह आमने-सामने मुलाकात लंबे अंतराल के बाद हुई है। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, ऊर्जा सहयोग, वीजा नीति और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद जताई गई थी।
बैठक में पश्चिम एशिया संकट प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। अमेरिका और उसके सहयोगी होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बहाल रखने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभावों को नियंत्रित करने के प्रयासों पर चर्चा कर रहे हैं।
भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि देश अपनी बड़ी ऊर्जा जरूरतों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर निर्भर है। ऐसे में पश्चिम एशिया की स्थिरता और समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत की आर्थिक प्राथमिकताओं से सीधे जुड़ी हुई है।
G7 मंच पर मोदी-ट्रंप की बातचीत को भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच आने वाले समय में व्यापार और ऊर्जा सहयोग को लेकर आगे की दिशा तय करने पर भी नजर रहेगी।





