नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की सिफारिश को मंजूरी देते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ (EPF) पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को बरकरार रखा है। यह फैसला देश के करोड़ों ईपीएफ खाताधारकों के लिए राहतभरा माना जा रहा है, क्योंकि लगातार तीसरे वर्ष ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, हाल ही में हुई केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की बैठक में 8.25 प्रतिशत ब्याज दर जारी रखने की सिफारिश की गई थी, जिसे अब केंद्र सरकार की ओर से अंतिम मंजूरी मिल गई है। इस निर्णय के बाद अब ईपीएफओ जल्द ही इस ब्याज दर को खातों में क्रेडिट करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
ईपीएफओ के तहत देशभर में सात करोड़ से अधिक कर्मचारी पंजीकृत हैं, जो हर महीने अपने वेतन से भविष्य निधि में योगदान करते हैं। 8.25 प्रतिशत की यह ब्याज दर स्थिर रिटर्न देने वाली योजनाओं में ईपीएफ को बनाए रखती है और इसे सेवानिवृत्ति बचत के लिए एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू वित्तीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ब्याज दर में कोई बदलाव न करने का फैसला लिया है। इससे कर्मचारियों की लंबी अवधि की बचत पर स्थिरता बनी रहेगी।
हालांकि, कई खाताधारकों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि ब्याज राशि उनके खातों में कब तक जमा होगी। आमतौर पर ईपीएफ का ब्याज वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद और सरकारी अधिसूचना जारी होने के पश्चात खातों में क्रेडिट किया जाता है।
सरकार के इस फैसले को कर्मचारियों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनकी भविष्य निधि पर मिलने वाले रिटर्न में स्थिरता बनी रहेगी और लंबी अवधि की बचत सुरक्षित रहेगी।





