नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से जुड़े संवेदनशील डेटा के डार्क वेब पर बिक्री के दावे ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। एक साइबर इंटेलिजेंस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि करीब 31GB डेटा को डार्क वेब पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया है। हालांकि, DRDO सूत्रों ने कहा है कि इस दावे की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, एक साइबर निगरानी संस्था ने डार्क वेब पर कथित रूप से चोरी किए गए DRDO और सैन्य डेटा की बिक्री का पता लगाया। दावा किया गया है कि इस डेटा को करीब 8 हजार डॉलर में बेचने की पेशकश की गई है। सार्वजनिक किए गए कुछ नमूना दस्तावेजों में कथित तौर पर वरिष्ठ वैज्ञानिकों से जुड़े तकनीकी विवरण और अन्य संवेदनशील जानकारियां शामिल हैं।
DRDO अधिकारियों ने फिलहाल किसी भी डेटा लीक की पुष्टि नहीं की है। उनका कहना है कि सामने आए दावों और उपलब्ध दस्तावेजों की तकनीकी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि डेटा वास्तव में DRDO से जुड़ा है या नहीं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल डार्क वेब पर किसी डेटा के दिखाई देने से उसकी वास्तविकता तय नहीं की जा सकती। डेटा के स्रोत, उसकी सत्यता और संभावित नुकसान का आकलन फॉरेंसिक जांच के बाद ही किया जा सकता है।
इससे पहले भी रक्षा क्षेत्र से जुड़े डेटा के कथित लीक के मामले सामने आ चुके हैं। साइबर सुरक्षा रिपोर्टों में कुछ समूहों द्वारा रक्षा दस्तावेजों तक पहुंच का दावा किया गया था, हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने कई मामलों में दावों की पुष्टि नहीं की थी और दस्तावेजों की वास्तविकता पर सवाल उठाए थे।
मौजूदा मामले में सुरक्षा एजेंसियां और साइबर विशेषज्ञ यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या कोई वास्तविक सेंधमारी हुई है या फिर यह किसी साइबर अपराधी समूह की भ्रामक गतिविधि है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।





