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BRICS में शामिल होने की पाकिस्तान की कोशिश अब तक नाकाम, 2023 में किया था आवेदन

नई दिल्ली। ब्रिक्स (BRICS) में शामिल होने की पाकिस्तान की कोशिश अभी तक सफल नहीं हो पाई है। इस्लामाबाद ने वर्ष 2023 में समूह की सदस्यता के लिए औपचारिक आवेदन किया था। इसके बाद पाकिस्तान ने रूस समेत अन्य सदस्य देशों से समर्थन जुटाने की कोशिश की, लेकिन करीब तीन साल बाद भी उसे सदस्यता नहीं मिल सकी है।

पाकिस्तान ने ऐसे समय में ब्रिक्स की सदस्यता के लिए कदम बढ़ाया था, जब संगठन अपने विस्तार की तैयारी कर रहा था। 2023 में ब्रिक्स नेताओं ने अर्जेंटीना, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल करने का फैसला किया था। हालांकि, पाकिस्तान इस विस्तार में जगह नहीं बना सका। बाद में नवंबर 2023 में पाकिस्तान के रूस में राजदूत ने पुष्टि की थी कि इस्लामाबाद ने 2024 के लिए सदस्यता का आवेदन किया है और रूस से विशेष समर्थन की उम्मीद है।

भारत की भूमिका अहम

पाकिस्तान की सदस्यता के रास्ते में भारत की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण चुनौती मानी जा रही है। ब्रिक्स में नए सदस्य को शामिल करने के लिए मौजूदा सदस्यों के बीच सहमति जरूरी होती है। भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक और सुरक्षा संबंधों को देखते हुए इस्लामाबाद की दावेदारी पर सहमति बनना मुश्किल माना जा रहा है।

पाकिस्तान को चीन और रूस से समर्थन की उम्मीद रही है। इसके बावजूद केवल इन देशों का समर्थन सदस्यता के लिए पर्याप्त नहीं है। भारत समेत मौजूदा सदस्यों की सहमति आवश्यक है।

ब्रिक्स से आर्थिक जुड़ाव बढ़ाने की कोशिश

सदस्यता न मिलने के बावजूद पाकिस्तान ने ब्रिक्स से जुड़े आर्थिक संस्थानों के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं। वर्ष 2025 में पाकिस्तान ने ब्रिक्स समर्थित न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) में करीब 58.2 करोड़ डॉलर की हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी दी थी। हालांकि, बैंक में हिस्सेदारी लेना ब्रिक्स की पूर्ण सदस्यता के बराबर नहीं है।

वर्तमान में ब्रिक्स का विस्तार हो चुका है और समूह में 11 सदस्य देश हैं। पाकिस्तान की सदस्यता की कोशिश जारी है, लेकिन भारत की भूमिका और सदस्य देशों के बीच सहमति उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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