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BRICS सम्मेलन ईरान और यूएई ने पीछे छोड़ी पुरानी कड़वाहट, भविष्य में सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव के बीच नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रिश्तों में सुधार के संकेत मिले हैं। दोनों देशों ने पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़कर भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने और सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने रविवार को कहा कि शनिवार को नई दिल्ली में यूएई के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ उनकी सकारात्मक और रचनात्मक बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि अतीत के मतभेदों को पीछे छोड़कर बेहतर भविष्य के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा जाए।

पेजेशकियन ने कहा कि ईरान की यूएई या क्षेत्र के अन्य पड़ोसी देशों के प्रति कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। उन्होंने पड़ोसी देशों को अपना भाई बताते हुए क्षेत्र में सहयोग और स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि, उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर ईरान की चिंता भी व्यक्त की और कहा कि क्षेत्रीय देशों की जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं होना चाहिए।

यह मुलाकात पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ईरान और यूएई के बीच हाल के महीनों में क्षेत्रीय संघर्ष को लेकर मतभेद रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की बातचीत और भविष्य में सहयोग बढ़ाने की सहमति को तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

ब्रिक्स सम्मेलन में पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा हुई। नई दिल्ली घोषणापत्र में सभी पक्षों से संयम बरतने, बातचीत और कूटनीति के जरिए विवादों का समाधान तलाशने तथा क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने का आह्वान किया गया।

भारत की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में ईरान और यूएई जैसे देशों के बीच मतभेदों के बावजूद साझा घोषणापत्र पर सहमति बनना भी भारतीय कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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