नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंका के बीच कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने शांति की अपील की है। उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को पत्र लिखकर कहा कि भारत पश्चिम एशिया में संवाद और शांति स्थापित करने में रचनात्मक भूमिका निभा सकता है।
दो पृष्ठ के पत्र में मीरवाइज ने महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत बातचीत को बढ़ावा देने और संघर्ष को आगे बढ़ने से रोकने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और मानवता को प्राथमिकता देने की अपील की।
मीरवाइज ने यह भी आग्रह किया कि पश्चिम एशिया का मौजूदा संघर्ष मुस्लिम समुदाय के भीतर विभाजन का कारण न बने। उन्होंने अपने समर्थकों से सांप्रदायिकता और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से ऊपर उठकर एकजुट रहने का आह्वान किया।
पत्र में मीरवाइज ने ईरानी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पेजेश्कियान का यह विचार सराहनीय है कि शांति की सामूहिक खोज के केंद्र में मानवता को रखा जाना चाहिए।
मीरवाइज का यह पत्र ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को सौंपा गया। ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आए थे।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए विवादों के समाधान पर जोर देता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईरानी राष्ट्रपति के साथ हालिया बातचीत में क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयासों तथा नौवहन की सुरक्षा पर जोर दिया था।





