नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा समूह में चल रहे आंतरिक विवाद पर चिंता जताते हुए दोनों पक्षों से मतभेद बंद कमरे में सुलझाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि टाटा समूह भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे जुड़े विवाद सार्वजनिक मंच पर नहीं आने चाहिए। मामले का जल्द और सौहार्दपूर्ण समाधान होना जरूरी है।
मुंबई में सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान सीतारमण ने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है, जिसे सुलझाने के लिए कारोबारी समझदारी और आपसी सौहार्द की जरूरत है। उन्होंने टाटा समूह की वैश्विक पहचान और ब्रांड वैल्यू का उल्लेख करते हुए कहा कि नेतृत्व को परिपक्वता दिखानी चाहिए, ताकि स्थिति जल्द सामान्य हो सके।
सरकार की ओर से विवाद में हस्तक्षेप किए जाने के सवाल पर वित्त मंत्री ने कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। उन्होंने कहा कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्दबाजी में टिप्पणी नहीं करना चाहतीं।
क्या है विवाद की वजह?
टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और सबसे बड़े शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के बीच पिछले कुछ महीनों से मतभेद सामने आ रहे हैं। विवाद के प्रमुख मुद्दों में टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग और चंद्रशेखरन की चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति शामिल हैं।
17 सितंबर को हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक में ये मतभेद खुलकर सामने आए थे। बोर्ड ने कंपनी की लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने और चंद्रशेखरन को फिर से चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया था। नोएल टाटा ने इन फैसलों का विरोध किया था, जबकि अन्य सदस्यों ने बहुमत से समर्थन दिया।
टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि समूह का नेतृत्व आपसी बातचीत से विवाद खत्म कर जल्द सामान्य स्थिति बहाल करेगा।





