नई दिल्ली। जेल को अपराधियों को सजा देने और उनके आपराधिक नेटवर्क को तोड़ने का स्थान माना जाता है, लेकिन देश की कई जेलों से सामने आ रहे मामले एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहे हैं। कुछ कुख्यात गैंगस्टर जेल में बंद होने के बावजूद बाहर अपना आपराधिक साम्राज्य चला रहे हैं। रंगदारी वसूली, धमकी, हत्या की साजिश और गैंगवार जैसी गतिविधियों को अंजाम देने के आरोप जेल में बंद अपराधियों पर लगते रहे हैं।
हालिया मामलों में अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में बिश्नोई गैंग की कथित भूमिका ने एक बार फिर जेलों की सुरक्षा व्यवस्था और अपराधियों के नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मोबाइल फोन और मुलाकातों से चल रहा नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, जेल के भीतर अवैध रूप से पहुंचाए गए मोबाइल फोन गैंगस्टरों के लिए बाहरी दुनिया से संपर्क बनाए रखने का बड़ा माध्यम बन जाते हैं। इनके जरिए वे अपने गुर्गों को निर्देश देने, कारोबारियों से रंगदारी मांगने और विरोधियों को धमकाने जैसी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों का सामना करते हैं।
इसके अलावा वकीलों से मुलाकात, परिचितों और अन्य कैदियों के माध्यम से भी संदेश बाहर पहुंचाए जाने की आशंका रहती है। जेल से बाहर आने वाले कैदी भी कई बार संदेश पहुंचाने की कड़ी बन सकते हैं।
लॉरेंस बिश्नोई और पुराने अंडरवर्ल्ड का उदाहरण
गुजरात की साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद उसके भाई अनमोल बिश्नोई का नाम कई आपराधिक मामलों की जांच में सामने आया है। हालांकि, इन मामलों में लगाए गए आरोपों का अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।
मुंबई अंडरवर्ल्ड के इतिहास में भी अरुण गवली और अश्विन नाइक जैसे गैंगस्टरों पर जेल के भीतर से आपराधिक गतिविधियां संचालित करने के आरोप लग चुके हैं।
भ्रष्टाचार भी बड़ी चुनौती
जेलों में भ्रष्टाचार को भी इस समस्या की प्रमुख वजह माना जाता है। आरोप हैं कि कुछ भ्रष्ट कर्मचारी रिश्वत के बदले कैदियों को प्रतिबंधित सामान और बाहरी संपर्क की सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। इससे जेल के भीतर बैठे अपराधियों के लिए अपना नेटवर्क सक्रिय रखना आसान हो जाता है।
सरकार और जांच एजेंसियां सतर्क
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जेलों से संचालित होने वाले गैंगस्टर और आतंकी नेटवर्क को तोड़ने के लिए एजेंसियों को समन्वित रणनीति बनाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, दिल्ली सरकार ने कुख्यात गैंगस्टरों और हाई-रिस्क कैदियों को दूसरे राज्यों की जेलों में स्थानांतरित करने की योजना पर भी काम किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में मोबाइल फोन की तस्करी रोकने, निगरानी बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई करने से इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।





