पिथौरागढ़। उम्र महज एक संख्या है और मजबूत इच्छाशक्ति के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। इस बात को साबित कर रहे हैं 64 वर्षीय पूरभू, जिन्होंने आदि कैलास अल्ट्रा मैराथन 2.0 में हिस्सा लेकर लोगों को फिट रहने और नियमित व्यायाम करने का संदेश दिया। दुर्गम पहाड़ी रास्तों, कम तापमान और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में आयोजित इस दौड़ में उनकी भागीदारी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में आयोजित आदि कैलास परिक्रमा रन का उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना और क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को देश-दुनिया के सामने लाना है। समुद्र तल से लगभग 10,500 से 15,000 फीट की ऊंचाई पर होने वाली यह दौड़ प्रतिभागियों के लिए शारीरिक क्षमता और सहनशक्ति की बड़ी परीक्षा है।
24 से 26 अक्टूबर तक आयोजन
आदि कैलास परिक्रमा रन का दूसरा संस्करण 24 से 26 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसका मुख्य केंद्र और बेस कैंप गुंजी गांव में बनाया गया है। दौड़ के अलग-अलग वर्गों में देश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
आयोजन में 70 किलोमीटर की अल्ट्रा रन, 42 किलोमीटर की फुल मैराथन, 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन और 10 व पांच किलोमीटर की दौड़ शामिल हैं। प्रतिभागियों को गुंजी, नाबी, कुटी और जोलिंगकोंग जैसे सीमांत क्षेत्रों से गुजरने का अवसर मिल रहा है।
फिटनेस के प्रति जागरूकता पर जोर
64 वर्षीय पूरभू की भागीदारी इस आयोजन का खास आकर्षण बनी है। उनकी मौजूदगी यह संदेश देती है कि उम्र बढ़ने के साथ भी सक्रिय जीवनशैली अपनाकर शारीरिक फिटनेस बनाए रखी जा सकती है। नियमित व्यायाम, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति स्वस्थ जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
सीमांत क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा
आदि कैलास अल्ट्रा मैराथन के माध्यम से उत्तराखंड पर्यटन विभाग सीमांत गांवों में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रहा है। इस तरह के आयोजनों से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, व्यास घाटी की प्राकृतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जा रहा है।





