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भारतीय नौसेना में शामिल हुआ पहला स्वदेशी बहुउद्देशीय युद्धपोत ‘समर्थक’, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मिली मजबूती

कारवार (कर्नाटक)। भारतीय नौसेना की ताकत में शुक्रवार को एक और इजाफा हुआ। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 16 अक्टूबर को कर्नाटक के कारवार स्थित नौसैनिक अड्डे पर पहले स्वदेशी बहुउद्देशीय पोत आईएनएस ‘समर्थक’ को नौसेना में शामिल किया। इस पोत का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने तमिलनाडु के कट्टुपल्ली स्थित अपने शिपयार्ड में किया है।

आईएनएस समर्थक को भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह नौसेना में शामिल किए जाने वाले चार बहुउद्देशीय पोतों में पहला है। इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।

कई महत्वपूर्ण अभियानों में आएगा काम

आईएनएस समर्थक को समुद्री निगरानी, गश्त और विभिन्न नौसैनिक अभियानों में सहायता के लिए तैयार किया गया है। यह पोत आधुनिक हथियारों, रडार, सेंसर और नई तकनीकों के परीक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके अलावा, इसका इस्तेमाल मानवरहित और स्वायत्त प्रणालियों से जुड़े अभियानों में किया जा सकेगा।

इस पोत में ऐसी प्रणालियां लगाई गई हैं, जिनकी मदद से समुद्र में निर्धारित स्थान पर स्थिर रहते हुए परीक्षण संबंधी गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। यह नौसेना को नई तकनीकों का मूल्यांकन करने और उन्हें परिचालन में शामिल करने में मदद करेगा।

आपदा राहत और बचाव कार्यों में भी उपयोगी

युद्धपोत समर्थक का इस्तेमाल मानवीय सहायता, आपदा राहत और समुद्र में संकटग्रस्त जहाजों की मदद के लिए भी किया जा सकेगा। इसमें चिकित्सा सुविधाएं और अग्निशमन व्यवस्था भी उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर यह अन्य जहाजों को खींचने और समुद्री आपात स्थितियों से निपटने में सहायता कर सकता है।

निजी क्षेत्र की भूमिका को बढ़ावा

नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने इस पोत को भारतीय रक्षा निर्माण में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। इसके निर्माण से देश में स्वदेशी युद्धपोत निर्माण की क्षमता को मजबूती मिली है।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि स्वदेशी पोत निर्माण और तकनीकी विकास से भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमताएं मजबूत होंगी। आईएनएस समर्थक का नौसेना में शामिल होना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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