हल्द्वानी। काठगोदाम में तैनात रेलवे कर्मचारी को प्लॉट और उस पर मकान बनाने का सपना दिखाकर कथित तौर पर 47 लाख रुपये हड़पने का मामला सामने आया है। आरोप है कि रकम लेने के बाद न तो प्लॉट पर कब्जा दिया गया और न मकान बनाया गया। थाने से लेकर एसएसपी तक शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, हल्द्वानी के आदेश के बाद काठगोदाम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
एफआईआर के अनुसार रेलवे में टीटी के पद पर तैनात सुधीर कुमार ने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 में भीम सिंह और अन्य लोगों ने दमुआढ़ूंगा बंदोबस्ती में खसरा संख्या 189 की 1200 वर्गफीट जमीन को अपना और विवादरहित बताते हुए 30 लाख रुपये में सौदा किया। पीड़ित के मुताबिक बैंक से लोन लेकर रकम देने के बाद अपनी मां राजश्री के नाम 28 दिसंबर 2021 को कथित रूप से पंजीकृत बैनामा भी कराया गया।
17 लाख और लिए, फिर भी मकान का सपना अधूरा
आरोप है कि इसके बाद जमीन पर मकान बनाने के नाम पर आरोपी ने 17 लाख रुपये अतिरिक्त मांगे। पीड़ित ने यह रकम भी दे दी, लेकिन आरोप के मुताबिक न मकान बनाया गया और न ही उसे जमीन पर कब्जा दिया गया। इस तरह कुल 47 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया गया है।
एफआईआर में रकम भुगतान का ब्योरा भी दर्ज है। इसके मुताबिक 24 सितंबर 2021 को चार लाख, 5 अक्टूबर को 10 लाख और 27 दिसंबर को 28 लाख रुपये बैंकर्स चेक के जरिए दिए गए। इसके अलावा छह लाख रुपये अलग-अलग किस्तों में नकद देने का भी दावा किया गया है।
विवाद छिपाने का भी आरोप
पीड़ित ने एसएसपी को दी शिकायत में आरोप लगाया कि बाद में उसे पता चला कि कथित रूप से इसी प्लॉट को लेकर एक फौजी से भी विवाद हुआ था और उसके द्वारा आरोपी के खिलाफ एफआईआर कराई गई थी। बैंक से कथित धोखाधड़ी के मामले में भी कार्रवाई होने की जानकारी मिलने का दावा शिकायत में किया गया है।
पैसे मांगे तो धमकी देने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम वापस मांगने और प्लॉट अथवा मकान देने की बात कहने पर उसके साथ गाली-गलौज की गई तथा जान से मारने की धमकी दी गई। 7 मार्च को मुलाकात के दौरान आरोपी द्वारा पैसे लौटाने और मकान बनाने से इनकार करने का भी आरोप लगाया गया है।
थाने से एसएसपी तक, फिर अदालत की शरण
पीड़ित के अनुसार 25 फरवरी को थाना काठगोदाम में शिकायत दी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 23 जुलाई को एसएसपी को प्रार्थनापत्र दिया गया। वहां से भी अपेक्षित कार्रवाई न होने पर न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। अदालत के आदेश के बाद अब पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।





