नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) फंडिंग में करीब 200 करोड़ रुपये के कथित फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। इस मामले में जांच एजेंसी ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर में कुल आठ ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान कथित फर्जीवाड़े से जुड़े अहम दस्तावेज और अन्य साक्ष्य बरामद किए गए।
ईडी के अनुसार, इस कथित रैकेट में एनजीओ और चैरिटेबल ट्रस्टों के माध्यम से कंपनियों से CSR फंड हासिल किया जाता था। इसके बाद सामाजिक कार्यों पर रकम खर्च करने के बजाय कमीशन काटकर बड़ी राशि संबंधित कंपनियों को वापस लौटाने का आरोप है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, मुंबई में बिना डिग्री के खुद को डॉक्टर बताने वाले धर्मेंद्र कुमार ने चैरिटेबल ट्रस्टों और संस्थाओं का नेटवर्क तैयार किया था। ये संस्थाएं खुद को स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय बताकर कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) से CSR फंड प्राप्त करती थीं।
ईडी को तलाशी के दौरान ट्रस्टों, ट्रस्टियों, बिचौलियों, कमीशन एजेंटों और उपकरण आपूर्तिकर्ताओं से जुड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली। एजेंसी के अनुसार, कई मामलों में ट्रस्ट मामूली कमीशन अपने पास रखते थे और शेष राशि नकद या अन्य माध्यमों से कंपनियों को लौटाए जाने के साक्ष्य मिले हैं।
जांच में कुछ मामलों में फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर बनाए गए बिलों के इस्तेमाल की भी जानकारी सामने आई है। आरोप है कि अतिरिक्त राशि फर्जी या शेल संस्थाओं के माध्यम से निकाली जाती थी। इस पूरे नेटवर्क में बिचौलियों और दलालों के लिए कमीशन तय होने की बात भी सामने आई है।
ईडी ने महाराष्ट्र में पांच, जबकि पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर में एक-एक स्थान पर तलाशी ली। एजेंसी ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और बरामद दस्तावेजों तथा वित्तीय लेनदेन की आगे जांच की जा रही है।





