न्यूयॉर्क। अमेरिका दक्षिणी ग्रीनलैंड में शीत युद्ध के दौर के अपने एक पुराने सैन्य अड्डे को फिर से खोलने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही पूर्वी ग्रीनलैंड में भी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई जाएगी। यह कदम अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच प्रस्तावित त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते का हिस्सा है। समझौते पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में हस्ताक्षर होने की संभावना है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका दक्षिणी ग्रीनलैंड के नार्सारसुआक में स्थित पूर्व ब्लूई वेस्ट वन सैन्य अड्डे को दोबारा सक्रिय कर सकता है। अमेरिका ने इस अड्डे को 1950 के दशक में बंद कर दिया था। इसके अलावा पूर्वी तट के मेस्टर्सविग में भी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी स्थापित की जाएगी। फिलहाल इस क्षेत्र का इस्तेमाल डेनमार्क की विशेष बल इकाई सिरियस डॉग स्लेज पेट्रोल करती है।
आर्कटिक सुरक्षा पर NATO की भूमिका
डेनमार्क के अनुसार, नए समझौते के बाद आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा NATO के व्यापक ढांचे के तहत आएगी। इससे सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल अमेरिका और डेनमार्क तक सीमित नहीं रहेगी। हालांकि समझौते का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
ग्रीनलैंड का रणनीतिक महत्व काफी अधिक है। यह उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बीच स्थित है और आर्कटिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति रखता है। शीत युद्ध के दौरान अमेरिका के ग्रीनलैंड में 17 सैन्य ठिकाने और 10 हजार से अधिक सैनिक थे। वर्तमान में वहां अमेरिका का प्रमुख सक्रिय सैन्य ठिकाना पिटुफिक स्पेस बेस है, जहां करीब 150 अमेरिकी सैन्यकर्मी तैनात हैं।
ट्रंप के दबाव के बाद समझौते की दिशा में बढ़े कदम
ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की योजना ऐसे समय सामने आई है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से इस क्षेत्र को अमेरिका की सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताते रहे हैं। उनके रुख के बाद अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच कई महीनों तक बातचीत चली। प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा और सैन्य सहयोग को मजबूत करना बताया जा रहा है।





