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निर्मला सीतारमण ने साफ किया UPI शुल्क का नियम, उपभोक्ताओं से नहीं लिया जाएगा MDR; व्यापारियों पर लगेगा 0.4% शुल्क

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने UPI भुगतान पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि MDR का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। यह शुल्क भुगतान सेवा प्रदाताओं और मर्चेंट भुगतान व्यवस्था के बीच लागू होगा।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 15 सितंबर को UPI के लिए नया MDR ढांचा पेश किया था। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा।

2,000 रुपये तक भुगतान रहेगा मुफ्त

सरकार के अनुसार, 2,000 रुपये तक के मर्चेंट UPI भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। वहीं, Person-to-Person (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किया जाने वाला UPI भुगतान किसी भी राशि पर मुफ्त रहेगा। सरकार का अनुमान है कि करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI लेनदेन इस नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।

वित्त मंत्री ने कहा कि MDR कोई टैक्स या उपकर नहीं है और इसकी राशि सरकार के खाते में जमा नहीं होगी। यह भुगतान व्यवस्था में शामिल बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और UPI एप्लिकेशन प्रदाताओं के बीच वितरित की जाएगी, ताकि डिजिटल भुगतान प्रणाली के संचालन और विस्तार में मदद मिल सके।

उपभोक्ताओं पर शुल्क डालने की अनुमति नहीं

सरकार ने स्पष्ट किया है कि बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि व्यापारी MDR की राशि ग्राहकों से अलग से वसूल न करें। UPI ऐप प्रदाताओं को भी ग्राहकों पर प्लेटफॉर्म शुल्क या छिपे हुए शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी।

नई व्यवस्था का उद्देश्य बड़े मर्चेंट लेनदेन से भुगतान प्रणाली के लिए राजस्व उपलब्ध कराना और UPI के बुनियादी ढांचे को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखना है। छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए मौजूदा मुफ्त UPI सुविधा को जारी रखा गया है।

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