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मणिपुर के राहत शिविरों में मौतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- हमें आदेश पारित करने के लिए मजबूर न करें

नई दिल्ली। मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा और वहां हुई संदिग्ध मौतों को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने मणिपुर के मुख्य सचिव को राहत शिविरों में हुई 25 संदिग्ध अप्राकृतिक मौतों पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं। सुनवाई के दौरान पीठ ने मणिपुर सरकार से पूछा कि विस्थापित लोगों की मौतों से संबंधित जानकारी सामने आने के बाद अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार से कहा कि वह अदालत को आदेश पारित करने के लिए मजबूर न करे और उठाए गए कदमों की जानकारी दे।

25 मौतों पर मांगी विस्तृत जानकारी

अदालत ने मुख्य सचिव को सभी 25 मामलों की जानकारी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मौत के कारणों से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है। अदालत ने यह भी पूछा कि संदिग्ध मौतों के मामलों में पोस्टमार्टम सीमित संख्या में ही क्यों किए गए और मृतकों के परिवारों को दिए गए मुआवजे की राशि इतनी कम क्यों रही।

अदालत के समक्ष रखी गई रिपोर्ट के अनुसार, मणिपुर के आठ जिलों के राहत शिविरों में कुल 640 मौतों का उल्लेख किया गया है। इनमें केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम किए जाने की जानकारी सामने आई। अदालत ने इस स्थिति पर भी स्पष्टीकरण मांगा है।

FIR और जांच में तेजी के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया कि अप्राकृतिक मौतों के सभी मामलों में एफआईआर दर्ज कराने, मौत के कारणों का उचित निर्धारण और जांच में तेजी सुनिश्चित की जाए। साथ ही राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा, सम्मान, चिकित्सा सुविधाओं और रोजमर्रा की आवश्यकताओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

यह सुनवाई वर्ष 2023 में मणिपुर में हुई हिंसा से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई से संबंधित याचिकाओं पर हुई। अदालत ने मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए विशेष अदालतों की जरूरत पर भी विचार करने को कहा है। केंद्र सरकार को इस संबंध में गुवाहाटी हाई कोर्ट की आवश्यकताओं पर तत्काल विचार करने का निर्देश दिया गया है।

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