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UPI MDR पर कांग्रेस का पलटवार, कहा- संसदीय समिति में नहीं आया था कोई विशेष प्रस्ताव

नई दिल्ली। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस ने उन दावों को खारिज किया है कि उसके सांसदों ने संसदीय वित्त संबंधी स्थायी समिति में UPI भुगतान पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव का समर्थन किया था। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और मनीष तिवारी ने कहा कि समिति के सामने हाल में घोषित शुल्क का कोई विशिष्ट प्रस्ताव नहीं रखा गया था।

कांग्रेस सांसदों ने किया दावा खारिज

गौरव गोगोई के अनुसार, वित्त विभाग के अधिकारियों के साथ समिति की बैठक में UPI शुल्क को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव नहीं आया था। उन्होंने कहा कि बैठक में MDR की आवश्यकता को लेकर सवाल जरूर उठाए गए, लेकिन दर, शुल्क की सीमा या छूट से संबंधित कोई निश्चित प्रस्ताव समिति के सामने नहीं था।

मनीष तिवारी ने भी कहा कि 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले प्रस्तावित MDR के संबंध में दर, राशि, अधिकतम सीमा या छूट की श्रेणियों पर समिति में चर्चा नहीं हुई थी। उन्होंने संसदीय समिति की कार्यवाही को राजनीतिक बहस में इस्तेमाल किए जाने पर भी आपत्ति जताई।

सरकार ने समिति की रिपोर्ट का दिया हवाला

वहीं, सरकार की ओर से कहा गया है कि संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने UPI के लिए चरणबद्ध राजस्व मॉडल और MDR व्यवस्था को लागू करने की सिफारिश की थी। समिति की रिपोर्ट में डिजिटल भुगतान व्यवस्था के संचालन, साइबर सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की लागत को देखते हुए टिकाऊ राजस्व मॉडल की जरूरत पर जोर दिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने सरकार द्वारा डिजिटल भुगतान व्यवस्था के लिए आवंटित करीब 2,000 करोड़ रुपये और उद्योग की अनुमानित परिचालन लागत करीब 20,700 करोड़ रुपये के बीच अंतर का भी उल्लेख किया था।

15 अक्टूबर से लागू होना है नया MDR

सरकार की मौजूदा व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने की घोषणा की गई है। सरकार के अनुसार, यह शुल्क सीधे आम उपभोक्ताओं से वसूल किया जाने वाला टैक्स नहीं है। पर्सन-टू-पर्सन भुगतान और निर्धारित सीमा तक के कई छोटे लेनदेन पर शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

UPI MDR को लेकर अब मुख्य विवाद इस बात पर केंद्रित है कि संसदीय समिति की सिफारिश को मौजूदा शुल्क व्यवस्था का समर्थन माना जाए या नहीं। कांग्रेस ने इसे अलग-अलग मुद्दे बताया है, जबकि सरकार समिति की रिपोर्ट का हवाला देकर अपने पक्ष को सही ठहरा रही है।

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