खरगे ने सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल पहले दो छंद गाए जाने के कर्नाटक सरकार के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 1937 में लिए गए अपने ऐतिहासिक निर्णय के अनुरूप दो छंदों के गायन की परंपरा का पालन कर रही है।
पीएम मोदी पर भी उठाए सवाल
सभा को संबोधित करते हुए खरगे ने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब पहले केवल दो छंद गाने का निर्णय लिया गया था, तो अब सभी छंद गाने की मांग क्यों की जा रही है। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे ऐतिहासिक नेताओं का भी उल्लेख किया।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
वंदे मातरम् के दो छंदों तक सीमित किए जाने के कर्नाटक सरकार के फैसले को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। अधिवक्ता गिरीश भारद्वाज ने जनहित याचिका दायर कर राज्य सरकार के आदेश पर सवाल उठाए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में राज्यों को वंदे मातरम् के आधिकारिक संस्करण से जुड़े निर्देशों का पालन करने को कहा था।
वहीं, भाजपा इस फैसले का विरोध कर रही है और पूर्ण वंदे मातरम् के गायन की मांग कर रही है। इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक और कानूनी बहस जारी रहने के आसार हैं।





