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आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता को समर्थन; BRICS सम्मेलन से निकलेंगे 50 से अधिक नतीजे

नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में शनिवार से शुरू हो रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से कई महत्वपूर्ण और ठोस परिणाम सामने आने की उम्मीद है। सम्मेलन में आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा के साथ वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के समर्थन जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।

भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान BRICS के एजेंडे को चार प्रमुख स्तंभों—लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता—पर केंद्रित किया है। इन क्षेत्रों में 50 से अधिक ठोस परिणाम, फ्रेमवर्क और एक्शन प्लान सामने आने की संभावना है। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, आतंकवाद से मुकाबला और इसके सभी स्वरूपों के खिलाफ साझा संकल्प सम्मेलन के प्रमुख निष्कर्षों में शामिल होगा।

वैश्विक संस्थाओं में सुधार पर जोर

सम्मेलन में वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार और बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर भी चर्चा होगी। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करता रहा है। ऐसे में UNSC की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को BRICS देशों से समर्थन मिलना नई दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जाएगा।

50 से अधिक ठोस परिणामों की तैयारी

भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान 30 से अधिक शहरों में 400 के करीब बैठकें आयोजित की गईं। सरकार के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारों के साथ उद्योग, शिक्षा जगत, संस्थानों, युवाओं और नागरिक समाज को भी इस प्रक्रिया से जोड़ा गया। भारतीय पक्ष का लक्ष्य BRICS को केवल घोषणाओं का मंच बनाने के बजाय व्यावहारिक सहयोग और ठोस परिणामों का माध्यम बनाना रहा है।

हालांकि पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर कुछ सदस्य देशों के बीच मतभेद चुनौती बने हुए हैं। इसके बावजूद भारत को उम्मीद है कि बातचीत और सहमति बनाने के प्रयासों के चलते सम्मेलन सकारात्मक परिणामों के साथ आगे बढ़ेगा।

भारत का प्रयास BRICS को किसी देश के खिलाफ गठबंधन के रूप में नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ की आवाज और विकास सहयोग के प्रभावी मंच के रूप में स्थापित करने का है।

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