बिश्केक, 2 सितंबर। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भारत ने चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के उस हिस्से को समर्थन देने से इनकार कर दिया, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है। भारत ने स्पष्ट किया कि किसी भी कनेक्टिविटी परियोजना में संबंधित देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SCO सम्मेलन में कहा कि ऐसी कनेक्टिविटी स्वीकार्य नहीं हो सकती, जो किसी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की अनदेखी करे। उनका यह रुख चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में सामने आया। भारत लंबे समय से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का विरोध करता रहा है, क्योंकि इसका एक हिस्सा PoK से होकर गुजरता है।
ईरान पर हमलों की भी निंदा
SCO सम्मेलन में सदस्य देशों ने ईरान पर हालिया सैन्य हमलों की निंदा करते हुए क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति बहाल करने पर जोर दिया। बिश्केक घोषणा में ईरानी क्षेत्र पर हुए हमलों को लेकर चिंता जताई गई और संप्रभुता तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की बात कही गई। भारत भी इस संयुक्त रुख का हिस्सा रहा।
BRI पर चीन को भारत का संदेश
SCO के आर्थिक एजेंडे में कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देना प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। चीन BRI को क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक विकास का प्रमुख माध्यम बताता है, लेकिन भारत का कहना है कि किसी भी परियोजना को अंतरराष्ट्रीय नियमों और संप्रभुता के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। भारत ने इसके बजाय चाबहार बंदरगाह और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसे विकल्पों को महत्व दिया है।
भारत के इस रुख से साफ है कि SCO में चीन और रूस के साथ सहयोग के बावजूद नई दिल्ली अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और क्षेत्रीय हितों से समझौता करने के पक्ष में नहीं है। सम्मेलन में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की जरूरत पर भी जोर दिया।





