नई दिल्ली। दिल्ली में 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विवाद फिर गहरा गया है। तृणमूल कांग्रेस नेता साकेत गोखले ने दावा किया है कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दिए जवाब में पैलेट गन के इस्तेमाल को मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में नहीं माना है। गोखले ने कहा है कि वह CRPF के इस जवाब को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखेंगे।
गोखले ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने RTI आवेदन और CRPF के जवाब की प्रति साझा की। उन्होंने बताया कि आवेदन में 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा पैलेट एम्युनिशन के इस्तेमाल, तैनाती और संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी मांगी गई थी। इसी दिन छात्रों ने संसद की ओर मार्च किया था।
CRPF के जवाब में कहा गया कि आवेदन में लगाए गए आरोप सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 24(1) के तहत मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित अपवाद के दायरे में नहीं आते। इसी आधार पर बल ने मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने से इनकार किया। गोखले ने इस रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि पैलेट के इस्तेमाल से घायल हुए प्रदर्शनकारियों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
इस मामले को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। जुलाई में प्रदर्शन के दौरान पैलेट के इस्तेमाल और कई लोगों के घायल होने की खबरों के बाद पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठे थे। आधिकारिक रिकॉर्ड में प्लास्टिक पैलेट के इस्तेमाल का भी उल्लेख सामने आया था।
वहीं, पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर मानवाधिकार संगठनों और विपक्ष की ओर से भी आपत्तियां जताई गई हैं। Amnesty International ने जुलाई के प्रदर्शनों की अपनी जांच में पैलेट-फायरिंग शॉटगन के इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप न होने का आरोप लगाया था।
अब CRPF के RTI जवाब ने इस मामले को एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में ला दिया है। सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर आगे होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि नागरिक प्रदर्शनों के दौरान ऐसे हथियारों के इस्तेमाल को लेकर क्या कानूनी और मानवीय मानक लागू होते हैं।





