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उत्तराखंड के हिमाच्छादित क्षेत्रों में आज से घर-घर जनगणना, 131 गांवों में 182 कर्मी संभालेंगे जिम्मेदारी

देहरादून। उत्तराखंड के हिमाच्छादित और दुर्गम क्षेत्रों में मंगलवार से घर-घर जनगणना अभियान शुरू हो गया। मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जनगणना विभाग ने विशेष तैयारियां की हैं। चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ के 131 हिमाच्छादित गांवों के साथ बदरीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री नगर निकायों में भी गणना की जाएगी।

जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, अभियान के लिए 139 प्रगणकों और 43 पर्यवेक्षकों, यानी कुल 182 कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है। ये कर्मचारी दुर्गम क्षेत्रों में घर-घर पहुंचकर जनगणना संबंधी जानकारी दर्ज करेंगे।

जनगणना के दायरे में चमोली के 23 हिमाच्छादित गांव और बदरीनाथ नगर पंचायत, रुद्रप्रयाग के चार गांव और केदारनाथ नगर पंचायत, उत्तरकाशी के 69 गांव और गंगोत्री नगर पंचायत तथा पिथौरागढ़ के 35 हिमाच्छादित गांव शामिल हैं।

जिलेवार तैनाती में उत्तरकाशी में 110, चमोली में 38, पिथौरागढ़ में 22 और रुद्रप्रयाग में 12 प्रगणक व पर्यवेक्षक लगाए गए हैं। विभाग ने स्थानीय प्रशासन और निकायों के साथ समन्वय कर अभियान की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।

जनगणना प्रक्रिया में डिजिटल माध्यम से नागरिकों की स्वगणना की सुविधा भी उपलब्ध है। 31 अगस्त तक उत्तराखंड के 338 नागरिक स्वगणना के माध्यम से अपनी प्रविष्टियां दर्ज कर चुके हैं। इनमें उत्तरकाशी के 277, चमोली के 29, पिथौरागढ़ के 24 और रुद्रप्रयाग के आठ नागरिक शामिल हैं।

जनगणना विभाग ने लोगों को साइबर ठगी से सावधान रहने की अपील की है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान किसी भी व्यक्ति से OTP, बैंक खाते या अन्य वित्तीय जानकारी नहीं मांगी जाएगी। किसी तरह की सहायता या जानकारी के लिए नागरिक टोल-फ्री हेल्पलाइन 1855 पर संपर्क कर सकते हैं।

दुर्गम और बर्फ से ढके क्षेत्रों में समय रहते जनगणना पूरी करने के लिए यह विशेष अभियान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद प्रत्येक परिवार और गांव को जनगणना प्रक्रिया में शामिल किया जाए।

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