इस्लामाबाद। पाकिस्तान में बलूचिस्तान की लगातार बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने हिंसा के लिए विदेशी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बलूचिस्तान में सक्रिय सशस्त्र समूहों को ‘विदेश प्रायोजित प्रॉक्सी’ बताते हुए कहा कि इनका मकसद क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करना और विकास की राह में बाधा डालना है।
मुनीर ने कहा कि बाहरी तत्व लगातार बलूचिस्तान में हिंसा भड़काने और वहां शांति एवं स्थिरता को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने ऐसे समूहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकेत देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
लंबे समय से जारी है उग्रवाद
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और लंबे समय से अलगाववादी हिंसा तथा उग्रवाद से जूझ रहा है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) समेत कई सशस्त्र समूह पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते रहे हैं। इस वर्ष भी प्रांत में कई बड़े हमले हुए हैं, जिसके बाद पाकिस्तान ने व्यापक सैन्य और सुरक्षा अभियान चलाए।
पाकिस्तानी नेतृत्व पहले भी बलूचिस्तान में हिंसा के पीछे विदेशी समर्थन का आरोप लगाता रहा है। इस्लामाबाद की ओर से कई मौकों पर भारत पर भी बलूच उग्रवादियों को समर्थन देने के आरोप लगाए गए हैं, हालांकि भारत इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
विकास में बाधा डालने का आरोप
मुनीर के मुताबिक हिंसा फैलाने वाले समूह केवल सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती नहीं दे रहे, बल्कि बलूचिस्तान में चल रही विकास परियोजनाओं और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर रहे हैं। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) से जुड़ी परियोजनाओं और चीनी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी बलूचिस्तान लंबे समय से संवेदनशील क्षेत्र बना हुआ है।
पाकिस्तानी सेना प्रमुख का बयान ऐसे समय आया है जब प्रांत में सुरक्षा चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं। ऐसे में इस्लामाबाद की रणनीति एक ओर सैन्य कार्रवाई तेज करने और दूसरी ओर विकास परियोजनाओं को जारी रखने पर केंद्रित दिखाई दे रही है।
बलूचिस्तान की हिंसा को लेकर पाकिस्तान के आरोपों और वहां के स्थानीय असंतोष के बीच आने वाले दिनों में सरकार की सुरक्षा नीति पर सबकी नजर रहेगी। विशेषज्ञों के लिए भी बड़ा सवाल यही है कि केवल सैन्य कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान निकलता है या राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी पहल की जरूरत पड़ेगी।




