तेहरान। अमेरिका की ओर से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाए जाने के बीच तेहरान ने प्रतिबंधों के असर को कम करने के लिए स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की रणनीति पर जोर दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने कहा है कि देश को आर्थिक दबाव से निपटने के लिए पड़ोसी और क्षेत्रीय देशों के साथ आर्थिक सहयोग मजबूत करना होगा।
ईरान का जोर द्विपक्षीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटाने और साझेदार देशों की स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने पर है। इसका उद्देश्य अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से जुड़े प्रतिबंधों के प्रभाव को सीमित करना और व्यापारिक लेनदेन को जारी रखना है।
स्थानीय मुद्रा में व्यापार पर जोर
कालीबाफ ने इराक में कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दौरान क्षेत्रीय आर्थिक स्वतंत्रता और आपसी सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि ईरान और उसके व्यापारिक साझेदार स्थानीय मुद्राओं के माध्यम से लेनदेन बढ़ाकर डॉलर पर निर्भरता कम कर सकते हैं।
ईरान पहले भी प्रतिबंधों से बचने के लिए वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था, वस्तु-विनिमय और गैर-डॉलर मुद्राओं में व्यापार का इस्तेमाल करता रहा है। अब अमेरिका की ओर से नए और कड़े प्रतिबंधों की चेतावनी के बीच इस रणनीति को और व्यापक बनाने की कोशिश की जा रही है।
अमेरिका ने बढ़ाया आर्थिक दबाव
अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक नई पाबंदियों का विस्तृत खाका सोमवार को सामने आ सकता है। वाशिंगटन का लक्ष्य ईरान की तेल आय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है।
ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को ‘आर्थिक आतंकवाद’ बताते हुए उनका विरोध किया है। तेहरान का कहना है कि बाहरी दबाव के बावजूद वह अपनी अर्थव्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों को जारी रखने के लिए नए रास्ते तलाश रहा है।
हालांकि, ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। तेल निर्यात में गिरावट और व्यापारिक बाधाओं के बीच स्थानीय मुद्रा पर भी दबाव है। ऐसे में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की रणनीति ईरान के लिए आर्थिक राहत का रास्ता बन सकती है, लेकिन इसकी सफलता उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के सहयोग पर निर्भर करेगी।





