नई दिल्ली। देश में स्कूली बच्चों की ओर से सामने आ रहे विरोध प्रदर्शनों ने शिक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनरेशन अल्फा के बच्चे शिक्षकों की कमी, खराब बुनियादी सुविधाओं, शौचालय, पेयजल, बिजली, पंखे, भोजन और स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर आवाज उठा रहे हैं।
पिछले कुछ सप्ताह में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में छात्रों ने स्कूलों के बाहर प्रदर्शन किए। कहीं बच्चों ने स्कूल के गेट पर ताला लगाया तो कहीं सड़क पर बैठकर प्रशासन से अपनी समस्याओं के समाधान की मांग की। कई जगह अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर छात्रों की शिकायतें सुननी पड़ीं।
शिक्षकों की कमी सबसे बड़ी समस्या
राजस्थान के जालौर सहित कई इलाकों में छात्रों ने शिक्षकों की कमी को लेकर विरोध जताया। बच्चों का कहना है कि पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से कई कक्षाओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कुछ स्कूलों में एक ही शिक्षक पर कई कक्षाओं की जिम्मेदारी होने की शिकायत सामने आई है। राजस्थान के सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि हजारों स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर और बिहार के गया में भी छात्रों ने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर प्रदर्शन किया। उनकी मांगों में पर्याप्त डेस्क-बेंच, साफ शौचालय, पेयजल, पंखे, पुस्तकालय और बेहतर मध्याह्न भोजन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
सरकारी आंकड़ों से भी सामने आई तस्वीर
छात्रों के विरोध को केवल स्थानीय समस्याओं तक सीमित नहीं माना जा रहा। सरकारी शिक्षा संबंधी आंकड़े भी देश के कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी की ओर संकेत करते हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि योजनाओं और बजट के बावजूद स्कूलों तक सुविधाओं का लाभ पूरी तरह क्यों नहीं पहुंच पा रहा है।
इन प्रदर्शनों की एक खास बात यह है कि बच्चे अब अपनी समस्याओं को लेकर सीधे प्रशासन तक पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया ने भी उनकी आवाज को व्यापक मंच दिया है। विशेषज्ञों के लिए यह संकेत है कि नई पीढ़ी शिक्षा के अधिकार और स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो रही है।
‘जेन अल्फा’ के ये विरोध प्रदर्शन सरकार और शिक्षा प्रशासन के सामने बुनियादी ढांचे, शिक्षक उपलब्धता और स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने की चुनौती को फिर सामने ला रहे हैं।





