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छात्रों की FIR पर केंद्र से भिड़ा CJP, सुप्रीम कोर्ट के रुख को लेकर लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली। छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर को लेकर केंद्र सरकार और CJP के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। CJP ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट की ओर से छात्रों को दी गई राहत के रास्ते में अड़चन डाल रही है और अदालत के आदेश की ऐसी व्याख्या कर रही है, जिससे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच जारी रखी जा सके। संगठन ने केंद्र से पहले किए गए आश्वासन को पूरी तरह लागू करने की मांग की है।

CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि आंदोलन समाप्त कराने के दौरान सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने का आश्वासन दिया गया था। संगठन का कहना है कि सरकार को अपने वादे के अनुरूप मामलों को पूरी तरह खत्म करना चाहिए। CJP ने चेतावनी दी है कि यदि आश्वासन पर अमल नहीं हुआ तो देशव्यापी आंदोलन फिर शुरू किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में अंतरिम आदेश देते हुए राज्यों को छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी थी, लेकिन छात्रों के खिलाफ किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई थी। अदालत ने 18 वर्ष से कम उम्र के गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा करने का निर्देश भी दिया था। साथ ही पुलिस कार्रवाई से जुड़े CCTV, ड्रोन फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने को कहा था।

CJP का कहना है कि यह रुख सरकार के साथ हुए समझौते से अलग है। संगठन के मुताबिक, सरकार ने आंदोलन खत्म कराने के लिए एफआईआर वापस लेने का भरोसा दिया था, इसलिए अदालत के आदेश को उस राजनीतिक समझौते के विपरीत इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि दिल्ली और अन्य राज्य कानून के अनुसार छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को बंद या वापस कर सकते हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘आपराधिक पृष्ठभूमि’ से आशय गंभीर और जघन्य अपराधों से है। इससे छात्रों के मामलों में राज्य सरकारों के पास कार्रवाई का कानूनी रास्ता खुला है।

मामले को लेकर अब केंद्र की अगली कार्रवाई पर नजर है। वहीं CJP ने संकेत दिया है कि यदि छात्रों के खिलाफ मामलों को लेकर सरकार अपने आश्वासन पर पूरी तरह अमल नहीं करती है, तो आंदोलन दोबारा तेज किया जा सकता है।

 

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