नई दिल्ली। नीट-यूजी और यूजीसी-नेट जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों को लेकर आलोचनाओं के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। एजेंसी ने प्रश्नपत्र तैयार करने वाले अपने पैनल से करीब 600 विशेषज्ञों को हटा दिया है और उनकी जगह नए विशेषज्ञों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की है। साथ ही अब परीक्षा से पहले हर प्रश्नपत्र की चार स्तरों पर जांच की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उसकी गुणवत्ता, तथ्यात्मक शुद्धता और संभावित त्रुटियों की कई चरणों में समीक्षा की जाएगी। चार स्तरीय जांच का उद्देश्य प्रश्नपत्र में गलत सवाल, उत्तर संबंधी खामियां और अन्य विसंगतियों को परीक्षा से पहले ही पकड़ना है। NTA का मानना है कि इससे परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बढ़ेगी।
NTA ने पुराने विशेषज्ञ पैनल में व्यापक फेरबदल का फैसला किया है। करीब 600 विशेषज्ञों को हटाने के साथ नए विशेषज्ञों को शामिल किया जा रहा है। यह कदम प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी समीक्षा की पूरी प्रक्रिया को नए सिरे से मजबूत करने की कवायद का हिस्सा है।
प्रश्नपत्र की गोपनीयता बनाए रखने के साथ NTA के कार्यालयों की सुरक्षा बढ़ाने की भी तैयारी है। रिपोर्टों के मुताबिक एजेंसी के कार्यालयों में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तैनाती की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य परीक्षा सामग्री और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा को और मजबूत करना है।
NEET-UG और UGC-NET समेत प्रमुख परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने NTA की कार्यप्रणाली और परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में सुधारों का सबसे बड़ा उद्देश्य लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करना है। एजेंसी की नई व्यवस्था में प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परीक्षा संचालन तक सुरक्षा और निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है।
NTA के सामने अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि नई व्यवस्थाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि आगामी परीक्षाओं में उनका प्रभाव जमीन पर भी दिखाई दे।





