Top 5 This Week

Related Posts

कठिन रास्तों के यात्री ज्ञानेश कुमार, अब 2029 लोकसभा चुनाव की कमान

नई दिल्ली। भारतीय चुनाव व्यवस्था की कमान संभाल रहे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का प्रशासनिक सफर चुनौतियों से भरा रहा है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1988 बैच के अधिकारी रहे कुमार ने केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारियां निभाने के बाद निर्वाचन आयोग का रुख किया। अब उनके नेतृत्व में देश की चुनावी व्यवस्था 2029 के लोकसभा चुनाव जैसे बड़े दायित्व की ओर बढ़ रही है।

27 जनवरी 1964 को उत्तर प्रदेश के आगरा में जन्मे ज्ञानेश कुमार ने IIT कानपुर से बीटेक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने बिजनेस फाइनेंस की पढ़ाई की और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पर्यावरण अर्थशास्त्र में अध्ययन किया। 1988 में IAS में चयन के बाद उन्हें केरल कैडर मिला।

कुमार ने केंद्र में रक्षा उत्पादन विभाग में संयुक्त सचिव के रूप में काम किया। इसके बाद गृह मंत्रालय में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। आगे चलकर वह संसदीय कार्य मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय के सचिव बने। सहकारिता मंत्रालय में उनके कार्यकाल के दौरान कई राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्थाओं के गठन और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े सुधारों पर काम हुआ।

मार्च 2024 में ज्ञानेश कुमार को निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया गया। इसके बाद 19 फरवरी 2025 को उन्होंने देश के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला। वह 2023 में बने नए नियुक्ति कानून के तहत इस पद पर आने वाले पहले मुख्य चुनाव आयुक्त हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर उनके कार्यकाल में मतदाता सूची की शुद्धता, तकनीक के इस्तेमाल, राजनीतिक दलों के साथ संवाद और चुनावी प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने पर जोर दिया गया। आयोग ने उनके नेतृत्व में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई सुधारात्मक कदम भी उठाए हैं।

ज्ञानेश कुमार के सामने अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी 2029 का लोकसभा चुनाव होगा। देश के आम चुनाव का विशाल पैमाना, करोड़ों मतदाताओं की भागीदारी और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा निर्वाचन आयोग के लिए बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में चुनावी निष्पक्षता, पारदर्शिता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर विशेष ध्यान रहेगा।

कुमार का प्रशासनिक अनुभव और विभिन्न मंत्रालयों में काम करने का लंबा अनुभव इस जिम्मेदारी में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि निर्वाचन आयोग को लेकर राजनीतिक बहस और उसकी निष्पक्षता पर उठते सवालों के बीच उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी कसौटी यही होगी कि देश की चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा और मजबूत हो।

Popular Articles